जेएनयू में नारेबाजी को लेकर प्रशासन की सख्त चेतावनी
राष्ट्रीय विश्वविद्यालय (JNU) प्रशासन ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ कथित आपत्तिजनक नारेबाजी के मामले में कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर नफरत फैलाने और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को अनुमति नहीं दी जाएगी। इस संदर्भ में प्रशासन ने सख्त कदम उठाने का संकेत दिया है, ताकि विश्वविद्यालय की गरिमा और देश की सुरक्षा बनी रहे।
छात्रों के खिलाफ शिकायत और राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस विवाद में JNU प्रशासन ने पुलिस को शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें बताया गया है कि लगभग 30 से 35 छात्रों ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं के खारिज होने के बाद कथित तौर पर उकसाने वाले नारे लगाए। इन नारेबाजी को सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के दायरे में माना जा रहा है। फिलहाल इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। वहीं, जेएनयू छात्रसंघ (JNUSU) की अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि नारे वैचारिक थे और किसी व्यक्ति पर व्यक्तिगत हमला नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि पूछा जाए कि क्या उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ लगाए गए नारे आपत्तिजनक लगे, तो उन्होंने जवाब दिया कि ये नेता 2002 में हुई कई हत्याओं के लिए जिम्मेदार हैं, लेकिन उनका मानना है कि देश में फासीवादी विचारधारा का अंत होना जरूरी है।
पिछले विवाद और राष्ट्रविरोधी नारों का इतिहास
यह पहली बार नहीं है जब JNU में नारेबाजी को लेकर विवाद हुआ हो। इससे पहले भी अफजल गुरु की फांसी के बाद कथित राष्ट्र-विरोधी नारों को लेकर राजनीतिक और कानूनी विवाद सामने आए थे। उस समय भी कन्हैया कुमार और उमर खालिद जैसे छात्र नेता मौजूद थे, जिन्हें बाद में राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। यह घटनाएं विश्वविद्यालय की राजनीतिक गतिविधियों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच जटिल संबंधों को दर्शाती हैं।










