भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंधों का नया अध्याय
भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आगामी वॉशिंगटन यात्रा से पहले गुरुवार को अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के साथ महत्वपूर्ण चर्चा की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, खनिज संसाधनों और रक्षा सेक्टर जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।
जयशंकर ने सोशल मीडिया पर साझा किया कि उन्होंने नई दिल्ली में अमेरिकी राजदूत से मिलकर खुशी व्यक्त की और दोनों देशों के बीच साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर बातचीत की। उन्होंने यह भी भरोसा जताया कि अमेरिका भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत बनाने में अपना योगदान देगा।
वहीं, अमेरिकी राजदूत ने कहा कि उनकी और जयशंकर की बातचीत में रक्षा, व्यापार, आवश्यक खनिज संसाधनों और साझा हितों पर चर्चा हुई। इस महीने की शुरुआत में पद संभालने वाले सर्जियो गोर ने संकेत दिया कि आने वाले समय में और भी कई महत्वपूर्ण कदम देखने को मिलेंगे।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की दिशा में प्रगति
भारत सरकार ने संसद में जानकारी दी कि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है। दोनों देश वर्तमान में मल्टी-सेक्टरल द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं, जो दोनों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।
विदेश मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि दोनों देश अपनी-अपनी राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए विदेश नीति अपनाते हैं। इसमें व्यापार, प्रतिबंध और क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित मुद्दे शामिल हैं, जो दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने का संकेत हैं।
हालांकि, पिछले साल अगस्त में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत टैरिफ और रूसी तेल पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाने के कारण बातचीत में बाधा आई थी। इसके बावजूद, दोनों पक्षों ने हाल ही में महत्वपूर्ण प्रगति की है, और नई दिल्ली ने यूरोपीय संघ के साथ अपने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के अंतिम चरण में भी सकारात्मक संवाद बनाए रखा है।
व्यापार में बाधाएं और भविष्य की संभावनाएं
पिछले साल भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते में कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन टैरिफ और अन्य मुद्दों के कारण गतिरोध उत्पन्न हो गया। इन मुद्दों में व्यापार प्रतिबंध, क्षेत्रीय विवाद और नई इमिग्रेशन नीति भी शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों ने हाल ही में व्यापार समझौते के लिए महत्वपूर्ण प्रगति की है। नई दिल्ली ने यूरोपीय संघ के साथ अपने फ्री ट्रेड समझौते के अंतिम चरण में भी वॉशिंगटन के साथ संवाद जारी रखा है, जिससे दोनों देशों के संबंध मजबूत होने की उम्मीद है।










