लाल किले धमाके की जांच में नए खुलासे और संदिग्ध नेटवर्क का पर्दाफाश
दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए-नए तथ्य सामने आ रहे हैं। इस मामले में गिरफ्तार किए गए डॉक्टर मुजम्मिल और डॉक्टर अदील के बाद अब उस मकान मालिक तक पहुंच बनाई गई है, जिसने इन साजिशकर्ताओं में से एक को किराए पर कमरा दिया था। यह व्यक्ति खुद को मद्रासी नाम से पहचानता है और इलाके में इसी नाम से जाना जाता है।
किराए पर मकान देने वाले का रहस्य और उसकी अनजानियत
गुरुग्राम और नूंह के ग्रे क्षेत्रों में कई लोग किराए पर कमरा देते हैं, लेकिन इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मद्रासी को कमरा देने वाला व्यक्ति यह नहीं जानता था कि उसका किरायेदार कौन है, वह कहां काम करता है और उसकी मंशा क्या है। मद्रासी ने बताया कि उसने केवल 1200 रुपये महीने में कमरा दिया था। वह आया, बोला कि उसे कमरे की जरूरत है, और मैंने उसे दे दिया। उसके बाद न तो उससे मुलाकात हुई और न ही बात।
मद्रासी का बयान और संदिग्ध किरायेदार का रहस्यमय परिचय
मद्रासी ने कहा कि वह 13 सितंबर को आया था और बोला कि उसे कमरा चाहिए। उसने बताया कि वह एक सामान्य दिखने वाला पढ़ा-लिखा लड़का है, जो खुद को डॉक्टर कहता था। उसने पूछा कि उसकी ड्यूटी कहां है और किस वार्ड में जॉइनिंग कर रहा है। उसने दो महीने का किराया 2400 रुपये दिया और सामान रखकर चला गया। उसके बाद वह फिर कभी नहीं आया और न ही कभी फोन पर बात हुई। उसने अपने सामान का कोई भी विवरण नहीं दिया।
गहरी जांच और आतंकवादी नेटवर्क का खुलासा
दिल्ली पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने खुलासा किया है कि लाल किले धमाके की योजना दो साल से बुनी जा रही थी। मुख्य साजिशकर्ता में डॉ. मुजम्मिल, डॉ. अदील और डॉ. उमर शामिल हैं। इन तीनों ने मिलकर लगभग 20 लाख रुपये नकद जुटाए, जिनका इस्तेमाल IED बनाने की सामग्री इकट्ठा करने में किया गया। इसी रकम से गुरुग्राम, नूंह और आसपास के इलाकों से 3 लाख रुपये खर्च कर 20 क्विंटल से अधिक NPK उर्वरक खरीदा गया, जो विस्फोटक बनाने में प्रयोग होता है।
जांच में यह भी पता चला है कि उमर ने सिग्नल ऐप पर 2-4 सदस्यों का एक छोटा ग्रुप बनाया था, जिसमें अदील और मुजम्मिल भी शामिल थे। इस ग्रुप के माध्यम से सभी योजना, पैसे का लेनदेन, सामग्री की खरीद और ट्रांसपोर्ट की जानकारी साझा की जाती थी। अधिकारियों का मानना है कि इन लोगों ने जानबूझकर छोटे ग्रुप बनाए ताकि लीक होने का खतरा कम हो। वे मैसेज तुरंत डिलीट कर देते थे और कोड वर्ड्स का प्रयोग करते थे।
दो साल की साजिश का खुलासा, डायरी और नोटबुक से संकेत
डॉक्टर उमर और मुजम्मिल के कमरे से बरामद डायरी और नोटबुक ने जांच की दिशा ही बदल दी है। ये दस्तावेज अलफला यूनिवर्सिटी के कैंपस में स्थित रूम नंबर 4 (डॉ. उमर) और रूम नंबर 13 (डॉ. मुजम्मिल) से मिले हैं। इसके अलावा, धौज में 360 किलो विस्फोटक बरामद करने वाली जगह से भी एक डायरी मिली है, जो यूनिवर्सिटी से महज 300 मीटर दूर है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये डायरी आने वाले दिनों में पूरी साजिश को समझने में मदद कर सकती है। इसमें दर्ज कोड वर्ड्स, लोकेशन्स, तारीखें, सामग्री और लगभग 25 नाम शामिल हैं, जिनमें अधिकतर जम्मू-कश्मीर और फरीदाबाद के क्षेत्र के हैं।
डायरी में 8 से 12 नवंबर की तारीखों पर कई महत्वपूर्ण एंट्री हैं, जिनमें संकेत मिलते हैं कि उस समय कुछ बड़ा करने की योजना थी। जांचकर्ता इन कोड्स को डिकोड कर रहे हैं, जिसमें वाहन, रास्ते और समय का उल्लेख हो सकता है।
मकान मालिक का सदमा और संभावित अन्य ठिकाने
जैसे-जैसे कमरे की जांच आगे बढ़ी, वैसे-वैसे मद्रासी का तनाव भी बढ़ता गया। वह बार-बार कहता रहा कि वह केवल कमरा देता है, उसे नहीं पता था कि उसका किरायेदार ऐसा करेगा। उसके घर के बाहर खड़े पड़ोसी भी हैरान थे। एक बुजुर्ग ने कहा कि मद्रासी एक सीधा-सादा आदमी है, जो कभी किसी से लड़ाई-झगड़ा नहीं करता। किरायेदार आते-जाते रहते हैं, इसलिए किसी को भी पता नहीं चलता कि वे क्या कर रहे हैं।
सीनियर अधिकारियों के अनुसार, यह सिर्फ दिल्ली ब्लास्ट का मामला नहीं है, बल्कि यह एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा प्रतीत होता है। दो साल की तैयारी और इतनी बड़ी मात्रा में सामग्री जुटाना अकेले संभव नहीं है।
धौज गांव के आसपास के लोग अभी भी सदमे में हैं। अलफला यूनिवर्सिटी के छात्र पिछले दो दिनों से डर के माहौल में हैं। वहां अफवाहें फैल रही हैं कि और भी नाम सामने आ सकते हैं। प्रशासन ने शांति बनाए रखने का आग्रह किया है। एक स्थानीय छात्र ने कहा कि उन्हें कभी नहीं लगा था कि उनके हॉस्टल के पास कोई इतना खतरनाक प्लान कर रहा होगा। पुलिस और फॉरेंसिक टीम लगातार जांच में लगी हुई है।










