केंद्र सरकार का राहुल गांधी के खिलाफ निर्णय में बदलाव
केंद्र सरकार ने अब राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने का फैसला वापस ले लिया है। पहले सरकार ने इस प्रस्ताव को लाने की घोषणा की थी, लेकिन अब उसने अपना रुख बदलते हुए इसे टाल दिया है। इस निर्णय के पीछे मुख्य कारण राजनीतिक गतिरोध को समाप्त करने और लोकसभा में फिर से स्थिरता बनाए रखने की कोशिशें हैं। सरकार का मानना है कि इससे संसद में चल रहे विवाद को और बढ़ने से रोका जा सकता है, जो देश की कार्यवाही में बाधा बन रहा था।
राजनीतिक विवाद और विपक्ष की प्रतिक्रिया
राहुल गांधी के भाषण को लेकर राजनीतिक माहौल गर्माया हुआ है। बीजेपी के सांसद संजय जायसवाल ने उनके कथित आपत्तिजनक हिस्सों को हटाने के लिए नोटिस जारी किया था। हालांकि, कुछ अंश पहले ही रिकॉर्ड से हटा दिए गए हैं, लेकिन बीजेपी का मानना है कि यह पर्याप्त नहीं है। दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की महत्वपूर्ण चिंताओं का जवाब देने के बजाय आलोचनाओं को टाल रही है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जैसे विपक्षी नेता देश की सुरक्षा, किसानों, ऊर्जा और डेटा सुरक्षा के सवाल उठा रहे हैं, जिन पर सरकार को जवाब देना चाहिए।
संसदीय जांच और आरोपों का सिलसिला
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर राहुल गांधी के कथित ‘अधिकारों का उल्लंघन’ और ‘अप्रमाणित आरोप’ लगाने की जांच के लिए संसदीय जांच समिति गठित करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने 11 फरवरी को अपने भाषण में सेना और रक्षा संस्थानों की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले बयान दिए हैं। साथ ही, उन्होंने विदेशी संगठनों जैसे जॉर्ज सोरोस और फोर्ड फाउंडेशन से जुड़े होने और उनकी फंडिंग की जांच की भी मांग की है। दुबे ने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने कई मंत्रालयों और भारतीय कॉरपोरेट जगत को लेकर भी बिना प्रमाण के आरोप लगाए हैं, जिससे देश की एकता और संप्रभुता को खतरा हो सकता है।










