अल-फलाह यूनिवर्सिटी में छुपे रहस्यों का खुलासा
आजतक की विशेष इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी का निरीक्षण किया, जहां छात्रों और कर्मचारियों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। इन खुलासों में उनकी पहचान गोपनीय रखी गई है और चेहरे ब्लर किए गए हैं ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
छात्रों और कर्मचारियों के सनसनीखेज खुलासे
एक एमबीबीएस छात्र ने खुफिया कैमरे पर बताया कि वह कभी मुजम्मिल को नहीं देख पाया। वह उमर नामक शिक्षक हमारे बैच के थे, जो लड़कों और लड़कियों को साथ बैठने से रोकते थे। छात्र ने यह भी कहा कि उन्हें उमर के बारे में कोई जानकारी नहीं है, और उन्होंने कभी भी यूनिवर्सिटी में i20 कार नहीं देखी।
यूनिवर्सिटी के एक कर्मचारी ने हॉस्टल की ओर इशारा करते हुए कहा कि उमर साहब इसी हॉस्टल में रहते थे। कर्मचारी ने बताया कि उमर बहुत कम बोलने वाले और अलग-थलग रहने वाले व्यक्ति थे। एक अन्य फैकल्टी सदस्य ने कहा कि वह हाल ही में जॉइन हुआ है और उनसे अभी तक कोई मुलाकात नहीं हुई है।
अस्पताल में मरीजों की संख्या में गिरावट और सुविधाओं की स्थिति
छात्रों ने बताया कि दिल्ली में हुए ब्लास्ट के बाद यूनिवर्सिटी के अस्पताल में मरीजों की संख्या में भारी कमी आई है। खुफिया कैमरे पर बात करते हुए एक छात्र ने कहा कि इस घटना के बाद से अस्पताल में मरीजों की संख्या घट गई है।
इसके अलावा, छात्रों ने यूनिवर्सिटी की पढ़ाई और सुविधाओं को लेकर नाराजगी भी जताई। उन्होंने कहा कि शिक्षण व्यवस्था कमजोर है, सुविधाएं अच्छी नहीं हैं और प्रैक्टिकल क्लासेस समय पर नहीं हो पातीं। हालांकि, छात्रों ने एक शिक्षक का नाम लिया, जो बहुत अच्छी टीचर थीं, और वह थीं शाहीन मैम।
यह नाम डॉ. शाहीन सईद का है, जिन्हें कथित तौर पर ‘डॉक्टर्स टेरर मॉड्यूल’ का मुख्य सदस्य माना जा रहा है और वर्तमान में पुलिस हिरासत में हैं।
मुजम्मिल सईद के किराए के कमरे में विस्फोटक मिलने का खुलासा
यूनिवर्सिटी के बाहर एक कॉलोनी में, डॉ. मुजम्मिल सईद गनई ने धमाके से पहले दो कमरे किराए पर लिए थे। स्थानीय लोगों ने बताया कि उसने झूठ बोलकर कमरे किराए पर लिए और बाद में उनमें विस्फोटक छुपाए।
मकान मालिक मद्रासी ने बताया कि मुजम्मिल 13 सितंबर को उनके पास आया था। उसने कहा कि यदि अकेले रहता है तो किराया 1200 रुपये है, और यदि परिवार के साथ रहता है तो 1500 रुपये। उसने दो महीने का किराया 2400 रुपये दिया और फिर कभी वापस नहीं आया।
पिछले हफ्ते, पुलिसकर्मी सिविल ड्रेस में आए और पूछताछ की कि क्या कोई डॉक्टर सामान छोड़कर गया है। सुबह कुछ कश्मीरी लोग भी आए और उन्होंने कमरे का पता लगाकर सारा सामान उठा लिया।
जांच एजेंसियों की नई खोजें और जांच का दायरा
जांच एजेंसियों के अनुसार, रेड फोर्ट ब्लास्ट की साजिश को समझना बहुत जटिल है। अब अल-फलाह यूनिवर्सिटी भी जांच के दायरे में आ गई है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कैसे आतंकी गतिविधियों में शामिल लोग एक शैक्षणिक संस्थान के भीतर रहकर अपने काम को अंजाम दे सके।











