दिल्ली में दिसंबर में वायु गुणवत्ता सबसे खराब
इस बार दिसंबर महीने में दिल्ली की वायु गुणवत्ता पिछले आठ वर्षों में सबसे खराब स्तर पर पहुंच गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, महीने के पहले 18 दिनों का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। 14 दिसंबर को AQI का स्तर 461 तक पहुंच गया, जो अत्यंत खतरनाक माना जाता है। GRAP (गैस रेस्पॉन्स ऐक्शन प्लान) के सबसे सख्त चरण लागू होने के बावजूद प्रदूषण में कोई उल्लेखनीय कमी नहीं देखी गई है।
ग्रैप के तहत कड़ी कार्रवाई के बावजूद प्रदूषण में कमी नहीं
दिल्ली में ग्रैप के स्टेज-IV के तहत निर्माण और ध्वस्तीकरण कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध, खुले में कचरा और बायोमास जलाने पर रोक, दूसरे राज्यों में पंजीकृत गैर-BS VI वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध, बिना वैध पॉल्यूशन सर्टिफिकेट वाले वाहनों को ईंधन न देने और सरकारी व निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य किया गया है। हालांकि, इन नियमों का कागजी तौर पर तो पालन हो रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका प्रभाव सीमित ही नजर आया है।
सैटेलाइट और ग्राउंड रिपोर्ट से खुलासा: आग की घटनाएं जारी
आजतक की ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) टीम ने सैटेलाइट और CPCB के डेटा का विश्लेषण किया, जिसमें पता चला कि 13 से 19 दिसंबर के बीच नासा (NASA) के FIRMS सैटेलाइट्स दिल्ली और एनसीआर में लगातार आग की घटनाओं को दर्ज कर रहे थे। इनमें पराली जलाना, लैंडफिल साइट्स और अन्य स्थानों पर आग लगाना शामिल है। जमीनी निरीक्षण में भी दिल्ली, नोएडा, फरीदाबाद, गाजियाबाद, बागपत, खेकड़ा और खरखौदा जैसे इलाकों में खुले में आग जलती हुई देखी गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली की भौगोलिक स्थिति जैसे कटोरे जैसी आकृति प्रदूषकों को हवा में फंसाए रखती है। हरियाणा और उत्तर प्रदेश से आने वाला प्रदूषण भी शहर में जमा हो जाता है। यही कारण है कि लागू किए गए प्रदूषण नियंत्रण उपाय प्रभावी साबित नहीं हो पा रहे हैं। CPCB के आंकड़ों से पता चलता है कि GRAP-IV लागू होने के बाद भी दिल्ली की हवा में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂), पीएम2.5 और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) का स्तर स्थिर रहा है।
14 दिसंबर को, GRAP-IV के लागू होने के एक दिन बाद ही प्रदूषकों का स्तर सबसे अधिक था। सैटेलाइट डेटा से पता चलता है कि नवंबर से दिसंबर तक दिल्ली के कई इलाकों में NO₂ का उच्च स्तर बना रहा। यह स्पष्ट संकेत है कि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए केवल आपातकालीन उपाय या मौसम पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। स्थायी समाधान के लिए प्रदूषण के स्रोतों पर प्रभावी और कठोर कार्रवाई आवश्यक है।











