दिल्ली के ऐतिहासिक स्मारकों को शादी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए खोलने की योजना
दिल्ली सरकार अब अपने ऐतिहासिक स्मारकों को विवाह और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए उपयोग में लाने की दिशा में कदम उठा रही है। इस नई पहल के तहत म्यूटिनी मेमोरियल, दारा शिकोह लाइब्रेरी, ग़ालिब हवेली और कुदसिया गार्डन जैसे ऐतिहासिक स्थल पर कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे। इस योजना में लगभग 80 विरासत स्थलों को शामिल करने का लक्ष्य है। सरकार ने इन स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही जीएसटी में राहत देने का भी प्रस्ताव रखा है, ताकि इन वेन्यूज़ की पहुंच अधिक लोगों तक हो सके।
प्राचीन धरोहरें और ऐतिहासिक स्थल योजना का हिस्सा बनेंगे
इस योजना में लोधी काल से मुग़ल काल तक की ऐतिहासिक धरोहरें भी शामिल हैं। इनमें साधना एंक्लेव की लोधी कालीन कब्र, जो हिंद-इस्लामी स्थापत्य का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, को भी शामिल किया जाएगा। इसके अलावा, कुदसिया गार्डन के मंडप, जो 18वीं सदी में मुहम्मद शाह की पत्नी कुदसिया बेगम ने बनवाए थे, को भी कार्यक्रम स्थलों में जोड़ा जा सकता है। वसंत विहार में लोधी और सैयद काल की दीवारें और मकबरें, चांदनी चौक की ग़ालिब हवेली और 14वीं सदी का बड़ा लाओ का गुम्बद जैसे स्थल भी इस योजना का हिस्सा बन सकते हैं।
सुरक्षा और आयोजन की व्यवस्था पर जोर
अधिकारियों ने बताया कि यह योजना अभी प्रारंभिक चरण में है और इस पर चर्चा चल रही है कि किन स्थलों को शामिल किया जाए और कार्यक्रम किस तरह आयोजित किए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि इन ऐतिहासिक इमारतों को किसी भी तरह की क्षति से बचाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए जाएंगे। सरकार इन स्थलों की बुकिंग को आसान बनाने के लिए जीएसटी में राहत देने पर भी विचार कर रही है, ताकि अधिक से अधिक लोग इन विरासत स्थलों का लाभ उठा सकें।
अधिकारियों के अनुसार, लगभग 80 स्मारकों को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर सांस्कृतिक और निजी कार्यक्रमों के लिए चुना जा सकता है। यह विचार पहले दिल्ली के पर्यटन मंत्री द्वारा प्रस्तुत किया गया था। विभाग इन स्थलों को आम जनता के लिए अधिक सुलभ बनाने के लिए बुनियादी ढांचे और अनुमति प्रक्रियाओं पर काम कर रहा है।
ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक समारोहों का अनूठा मेल
यदि यह योजना सफल होती है, तो दिल्ली की ऐतिहासिक इमारतें केवल इतिहास की धरोहर नहीं रह जाएंगी, बल्कि वे आधुनिक भारतीय शादियों और सांस्कृतिक आयोजनों का भी हिस्सा बन जाएंगी। इस तरह पुरातन वैभव और आधुनिक रौनक का अनूठा संगम देखने को मिलेगा, जो दिल्ली की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देगा।










