दिल्ली दंगा मामले में ताहिर हुसैन को कोर्ट का झटका
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 2020 के दंगों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण सुनवाई में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) विधायक ताहिर हुसैन सहित तीन आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। इन आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत आरोप लगाए गए हैं।
दंगों की साजिश और आरोपियों की भूमिका
इस मामले में आरोप है कि आरोपियों ने दिल्ली के करनाल बाइपास रोड पर दाऊद नामक स्कॉर्पियो वाहन का उपयोग कर हिंसा फैलाने का प्रयास किया। साथ ही, सलीम मलिक पर भी आरोप है कि वह CAA-NRC विरोधी बैठकों के 11 कथित आयोजकों और वक्ताओं में शामिल था। पुलिस के अनुसार, इन आयोजकों में मोहम्मद सलीम खान, मोहम्मद जलालुद्दीन उर्फ गुड्डू भाई, शहनवाज, फुरकान, मोहम्मद अय्यूब, मोहम्मद यूनुस, तबस्सुम, मोहम्मद अयाज और खालिद शामिल थे।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला और जमानत की स्थिति
गौरतलब है कि 5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पांच आरोपियों को जमानत दी थी, जिनमें गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद शामिल हैं। हालांकि, कोर्ट ने जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और शारजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इन दोनों के खिलाफ UAPA के तहत मामला बनता है और सभी आरोपी समान स्थिति में नहीं हैं। इस मामले में कुल 20 आरोपियों के नाम सामने आए थे, जिनमें से दो अभी भी फरार हैं। शेष 18 में से कई ने पहले ही जमानत याचिकाएं दायर की हैं, जिनमें से सात आरोपी अभी भी जेल में हैं, जिनमें उमर खालिद, शारजील इमाम, अथर खान, सलीम मलिक, ताहिर हुसैन, तसलीम अहमद और खालिद सैफी शामिल हैं।











