दिल्ली में बढ़ती स्वास्थ्य समस्याएं और मौतें
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण और खराब जीवनशैली के कारण स्वास्थ्य संकट गहरा होता जा रहा है। ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में श्वसन रोगों से होने वाली मौतों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जो चिंता का विषय बन गई है। इस वर्ष दिल्ली में हर दिन लगभग 25 लोग सांस संबंधी बीमारियों के कारण जान गंवा रहे हैं।
श्वसन और परिसंचरण तंत्र से जुड़ी मौतें बढ़ीं
2024 में दिल्ली में श्वसन (respiratory) रोगों से कुल 9,211 मौतें दर्ज हुई हैं, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 8,801 था। इस तरह एक ही साल में सांस की बीमारियों से होने वाली मौतों में स्पष्ट बढ़ोतरी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अस्थमा, निमोनिया, फेफड़ों का कैंसर और टीबी जैसी बीमारियों का बढ़ना मुख्य कारण है। प्रदूषण, जहरीली हवा, धूल-धुआं और जीवनशैली में बदलाव इन बीमारियों को बढ़ावा दे रहे हैं। यह भी चिंताजनक है कि ये बीमारियां अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि युवा और बच्चे भी इनसे प्रभावित हो रहे हैं।
मौतों का मुख्य कारण और अन्य स्वास्थ्य आंकड़े
2024 में दिल्ली में सबसे अधिक मौतें परिसंचरण तंत्र (circulatory system) से जुड़ी बीमारियों के कारण हुई हैं, जिनकी संख्या 21,262 है। इनमें हार्ट अटैक, स्ट्रोक, धमनियों में रुकावट और हृदय फेलियर शामिल हैं। पिछले साल की तुलना में यह आंकड़ा लगभग 5,500 अधिक है, जब 15,714 मौतें दर्ज हुई थीं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस बढ़ोतरी को तनावपूर्ण जीवनशैली, खराब खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी और प्रदूषण से जोड़कर देख रहे हैं।
इसके अलावा संक्रामक और परजीवी रोग भी मौतों का दूसरा बड़ा कारण हैं, जिनमें 16,060 मौतें हुई हैं। हालांकि यह संख्या 2023 के 20,781 मामलों से कम है, लेकिन दूषित पानी, स्वच्छता की कमी और घनी आबादी के कारण खतरा अभी टला नहीं है। कुल मिलाकर, 2024 में दिल्ली में 1,39,480 मौतें हुई हैं, जो पिछले साल के 1,32,391 से अधिक हैं। इनमें पुरुष, महिलाएं और अन्य लिंग वर्ग के लोग शामिल हैं। मृत्यु दर भी बढ़ी है, जो 2023 में 6.16 प्रति हजार थी, वह 2024 में बढ़कर 6.37 हो गई है। वहीं, इस वर्ष दिल्ली में जीवित जन्मों की संख्या 3,06,459 रही, जो पिछले साल की तुलना में 8,628 कम है।











