दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए नई रणनीतियों का ऐलान
दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि वायु प्रदूषण को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों, सार्वजनिक परिवहन और सख्त नियमों के माध्यम से प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। आगामी समय में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति में बड़े बदलाव की उम्मीद है, जो शहर की वायु गुणवत्ता सुधारने में मदद करेगा।
प्रदूषण घटाने के लिए सरकार की नई पहलें और इलेक्ट्रिक वाहनों का बढ़ता रजिस्ट्रेशन
ट्रांसपोर्ट मंत्री डॉ. पंकज सिंह ने कहा कि विपक्ष द्वारा लगाए गए प्रदूषण से संबंधित आरोपों का जवाब देते हुए, सरकार आंकड़ों के साथ स्पष्टता चाहती है। उन्होंने बताया कि पिछली आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) सरकार के दौरान दिल्ली में केवल 80 हजार इलेक्ट्रिक वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ था। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में यह संख्या बढ़कर एक लाख से अधिक हो चुकी है।
इलेक्ट्रिक बसें, सख्त ट्रैफिक नियम और प्रदूषण पर सरकारी प्रयास
मंत्री ने बताया कि दिल्ली में अब तक 3518 इलेक्ट्रिक बसें संचालित हो चुकी हैं, और सरकार का लक्ष्य है कि 2026 तक इनकी संख्या 7000 तक पहुंच जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए। साथ ही, ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाली गाड़ियों के चालान, PUC (प्लेटिक यूनिट कंसंट्रेशन) रजिस्ट्रेशन और बॉर्डर पर सख्ती से कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि ‘रेड लाइट ऑन, इंजन ऑफ’ योजना से प्रदूषण में कोई खास कमी नहीं आई थी, इसलिए अब नई EV नीति के माध्यम से स्थायी समाधान पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। दिल्ली के सरकारी अस्पतालों को भी निर्देश दिए गए हैं कि सांस से जुड़ी बीमारियों के मरीजों का बेहतर इलाज सुनिश्चित किया जाए।
मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खुद दिल्ली छोड़कर पंजाब के शीशमहल में रह रहे हैं, इसलिए वे दिल्ली पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं रखते। साथ ही, ट्रैफिक प्रबंधन और मेट्रो नेटवर्क के विस्तार पर भी काम जारी है, जिससे सार्वजनिक परिवहन को मजबूत किया जा सके।











