कोहरे के कारण सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी
19 जनवरी को नोएडा के सेक्टर 150 में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत हो गई। घने कोहरे के बीच उनकी कार अनियंत्रित होकर पानी से भरे गड्ढे में गिर गई। पुलिस के अनुसार, कम दृश्यता और तेज गति इस हादसे का मुख्य कारण हो सकते हैं।
देशभर में कोहरे के कारण सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2022 में भारत में कोहरे के कारण कुल 34,266 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इनमें से 14,583 लोगों की जान चली गई और 30,796 लोग घायल हुए। 2020 में इन हादसों की संख्या 26,541 थी, जिसमें 12,084 मौतें हुईं। 2021 में यह आंकड़ा बढ़कर 28,934 हो गया और 13,372 लोगों की मौत हुई। यह स्पष्ट संकेत है कि हर साल कोहरे से होने वाली दुर्घटनाओं और मौतों में इजाफा हो रहा है।
दिल्ली में कोहरे का प्रभाव और सड़क सुरक्षा
दिल्ली में जनवरी का महीना कोहरे के कारण सबसे अधिक खतरनाक माना जाता है। भारतीय मौसम विभाग के पिछले 30 वर्षों के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में दिल्ली में औसतन 26 दिन हल्का कोहरा, 18 दिन मध्यम कोहरा, 11 दिन घना कोहरा और आठ दिन बहुत घना कोहरा रहता है। दिसंबर में भी कोहरे की स्थिति गंभीर रहती है, जबकि नवंबर और फरवरी में हालात थोड़े बेहतर होते हैं। इस मौसम में दिल्ली की आधी से ज्यादा रातें और सुबहें कोहरे में डूबी रहती हैं।
खुले मैनहोल और सीवर से खतरा
कम दृश्यता के साथ-साथ खुले मैनहोल और सीवर भी लोगों के जीवन के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार, 2020 में खुले मैनहोल और सीवर में गिरने से 140 हादसे हुए, जिनमें 142 लोगों की मौत हो गई। 2021 में इन हादसों की संख्या 143 रही, जिनमें 134 लोग मारे गए। 2022 सबसे खतरनाक साल साबित हुआ, जब 207 हादसों में 207 मौतें दर्ज की गईं। 2023 में हादसों की संख्या कम जरूर हुई, लेकिन मौतें अभी भी अधिक रहीं।
यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि जनवरी में कोहरा, खराब सड़कें, तेज रफ्तार और खुले मैनहोल मिलकर दिल्ली-एनसीआर की सड़कों को अत्यंत खतरनाक बना देते हैं। थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।










