दिल्ली सरकार की मुफ्त तीर्थ यात्रा योजना में खामियां और अनिश्चितता
दिल्ली सरकार द्वारा बुजुर्गों के लिए शुरू की गई मुफ्त तीर्थ यात्रा योजना का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को धार्मिक स्थलों की यात्रा कराना था। इस योजना को आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने बड़े उत्साह के साथ शुरू किया था, जिसमें हर विधानसभा क्षेत्र से हजारों बुजुर्गों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य था। लेकिन हाल ही में प्राप्त जानकारी से पता चला है कि इस योजना में कई महत्वपूर्ण खामियां और अनिश्चितताएं मौजूद हैं, जो इसकी प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करती हैं।
योजना की शुरुआत और यात्रा आंकड़ों में गिरावट
2018 में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ‘मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना’ की शुरुआत की, जिसमें दिल्ली के 70 विधानसभा क्षेत्रों से हर एक से 1100 बुजुर्गों को मुफ्त यात्रा का लाभ दिया जाना था। इस योजना में 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग अपने पति या पत्नी के साथ यात्रा कर सकते हैं, और 70 वर्ष से ऊपर के बुजुर्ग एक सहायक के साथ यात्रा कर सकते हैं। शुरुआत में केवल पांच धार्मिक स्थलों को शामिल किया गया था, लेकिन बाद में रामेश्वरम, शिर्डी, हरिद्वार, ऋषिकेश, मथुरा, वृंदावन, अयोध्या जैसी कई जगहें जोड़ दी गईं।
RTI के माध्यम से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 2019-20 में इस योजना के तहत 35,759 बुजुर्गों ने यात्रा की, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। कोरोना महामारी के कारण 2020-21 में यात्रियों की संख्या शून्य हो गई। इसके बाद 2021-22 में 15,988, 2022-23 में 18,980 और 2023-24 में केवल 16,200 बुजुर्ग ही यात्रा कर सके। इस तरह कोरोना के बाद भी योजना में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ और यात्रियों की संख्या में लगातार गिरावट देखी गई।
खामियां और योजना की अनिश्चितता
RTI के जवाब में सामने आई सबसे बड़ी समस्या यह है कि सरकार के पास यह जानकारी ही नहीं है कि कितने धर्म के लोग यात्रा कर रहे हैं और उन पर कितना खर्च हुआ है। यह एक सरकारी कल्याण योजना होने के बावजूद बुनियादी आंकड़ों का अभाव चिंता का विषय है।
इसके अलावा, 10 मार्च 2026 को प्राप्त RTI जवाब में 2024-25 और 2025-26 के किसी भी डेटा का उल्लेख नहीं है। जबकि इस समय के दौरान नई भाजपा (BJP) सरकार ने सत्ता संभाली थी, फिर भी इस योजना के संचालन या खर्च का कोई स्पष्ट विवरण नहीं है। इससे यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि योजना अभी भी चल रही है या बंद कर दी गई है।
सबसे अधिक पसंद किए गए धार्मिक स्थलों में रामेश्वरम सबसे ऊपर रहा, जहां 27,409 लोग गए। इसके बाद द्वारकाधीश (26,388), जगन्नाथ पुरी (7,819) और तिरुपति (6,763) का नंबर आता है।
अंत में, यह सवाल उठता है कि इस योजना का वर्तमान में क्या हाल है। RTI के जवाब से पता चलता है कि आखिरी वर्षों में यह योजना कमजोर पड़ने लगी थी, और नई सरकार के आने के बाद इसका कोई आधिकारिक डेटा उपलब्ध नहीं है। बिना ताजा आंकड़ों के यह तय करना मुश्किल है कि यह योजना अभी भी सक्रिय है, बंद हो गई है या फिर बदल दी गई है।









