दिल्ली नगर निगम उपचुनाव में मुस्लिम बहुल सीटों का मुकाबला तेज
दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की 12 पार्षद सीटों पर हो रहे उपचुनाव में सबसे अधिक ध्यान मुस्लिम बहुल क्षेत्र चांदनी महल की सीट पर केंद्रित है। यह सीट पिछले तीन दशकों से शोएब इकबाल के परिवार का गढ़ रही है, जिन्होंने इस क्षेत्र में अपनी मजबूत सियासी पकड़ बनाई है। इस बार के चुनाव में राजनीतिक दलों के साथ-साथ मुस्लिम नेताओं की भी प्रतिष्ठा दांव पर लगी है, क्योंकि यह सीट उनके राजनीतिक वर्चस्व का महत्वपूर्ण प्रतीक है।
शोएब इकबाल का राजनीतिक वर्चस्व और उपचुनाव का नया समीकरण
मटिया महल विधानसभा सीट से छह बार विधायक रहे शोएब इकबाल ने अपने बेटे आले इकबाल को आम आदमी पार्टी (AAP) से चुनाव लड़वाया और वह विजेता बनकर उभरे। इस जीत के बाद अब चांदनी महल वार्ड में उपचुनाव हो रहा है, जिसमें शोएब इकबाल अपने समर्थक उम्मीदवार को जिताने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं। पार्टी ने उनके पसंदीदा उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया, तो उन्होंने पार्टी छोड़ दी और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक (All India Forward Block) के मोहम्मद इमरान को समर्थन दिया है। वहीं, आम आदमी पार्टी ने पुराने कार्यकर्ता मुदस्सर उस्मान को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने कुंवर शहज़ाद अहमद और भाजपा ने सुनील शर्मा को मैदान में उतारा है।
मुस्लिम वोटों का समीकरण और चुनावी जंग का रंग
चांदनी महल सीट पर मुस्लिम बहुलता है, जहां 80 प्रतिशत से अधिक मतदाता मुस्लिम समुदाय से हैं। इस क्षेत्र में मुस्लिम वोटरों का बड़ा हिस्सा कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP), भाजपा और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के उम्मीदवारों के बीच बंटा हुआ है। पिछले चुनावों में मुस्लिम वोटों का झुकाव कांग्रेस की ओर था, लेकिन इस बार स्थिति बदलती दिख रही है। भाजपा ने मुस्लिम बहुल सीट पर सुनील शर्मा को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने अपने मुस्लिम नेताओं को मैदान में उतारा है। इस चुनाव का परिणाम न केवल राजनीतिक वर्चस्व का संकेत देगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि दिल्ली का मुस्लिम मतदाता किसके साथ है।











