दिल्ली में सियासी बदलाव के बीच शोएब इकबाल का वर्चस्व कायम
राजनीतिक हलकों में दिल्ली की सत्ता और सियासत में व्यापक बदलाव देखने को मिल रहा है, लेकिन शोएब इकबाल का प्रभाव अभी भी मजबूत बना हुआ है। दिल्ली में सरकारें बदलती रहीं, पर शोएब इकबाल की राजनीतिक पकड़ में कोई कमी नहीं आई है। दिल्ली नगर निगम (MCD) के उपचुनाव में ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक (AIFB) के उम्मीदवार मोहम्मद इमरान की जीत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पुरानी दिल्ली के इलाकों में उनका दबदबा बरकरार है।
एमसीडी उपचुनाव के नतीजे और राजनीतिक समीकरण
मंगलवार को घोषित हुए दिल्ली एमसीडी की 12 सीटों के परिणामों में भाजपा ने सात, आम आदमी पार्टी ने तीन, कांग्रेस ने एक और एक सीट अन्य पार्टी ने जीती है। सबसे बड़ी जीत चांदनी महल वार्ड से शोएब इकबाल के उम्मीदवार मोहम्मद इमरान ने हासिल की, जबकि आप को नारायणा वार्ड में सबसे कम वोटों से हार का सामना करना पड़ा। इस उपचुनाव में भाजपा को दो सीटों का नुकसान हुआ है, वहीं कांग्रेस को एक सीट का लाभ मिला है। उल्लेखनीय है कि एक सीट पहले आप के कब्जे में थी, जिसे अब अन्य पार्टी ने जीत लिया है। शोएब इकबाल को नाराज करना आप के लिए महंगा साबित हुआ, क्योंकि इस हार ने भाजपा को बढ़त बनाने का मौका गंवा दिया।
चांदनी महल की जीत और राजनीतिक संघर्ष
चांदनी महल वार्ड से सबसे बड़ी जीत हासिल करने वाले मोहम्मद इमरान ने 11814 वोट प्राप्त किए, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी आम आदमी पार्टी के मुदस्सर उस्मान को 7122 वोट मिले। यह जीत तीन साल पहले 2022 में हुई थी, जब इस सीट पर आम आदमी पार्टी ने सबसे अधिक वोट हासिल किए थे। पूर्व विधायक शोएब इकबाल के बेटे आले मोहम्मद इकबाल ने आप के टिकट पर चुनाव लड़ा और बड़ी मतों से कांग्रेस को हराया था। इस बार भी मोहम्मद इमरान ने अपने प्रतिद्वंद्वी को भारी मतों से हराकर अपने वर्चस्व को कायम रखा।
शोएब इकबाल ने अपने समर्थकों के साथ मिलकर इस जीत को सुनिश्चित किया, जबकि पार्टी ने उनके पसंदीदा उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया। इससे नाराज होकर उन्होंने पार्टी छोड़ दी और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के उम्मीदवार मोहम्मद इमरान को समर्थन दिया। इस जीत ने साबित कर दिया कि तीन दशक से इलाके में उनका दबदबा कायम है, और वह किसी भी कीमत पर इसे नहीं गंवाना चाहते।
शोएब इकबाल का राजनीतिक वर्चस्व उनके परिवार और समर्थकों के साथ मजबूत है। उन्होंने अपने बेटे आले मोहम्मद को विधायक बनाकर इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत की है। इस तरह, दिल्ली की पुरानी दिल्ली में शोएब इकबाल का प्रभाव अभी भी कायम है, और उनकी बादशाहत को चुनौती देना आसान नहीं है।











