दिल्ली हाईकोर्ट ने आबकारी नीति मामले में अंतिम नोटिस जारी किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने आबकारी नीति से जुड़े मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर प्रदान किया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने 22 अप्रैल तक का समय निर्धारित किया है। यह मामला निचली अदालत की टिप्पणियों और जांच एजेंसियों की आपत्तियों से संबंधित है।
कोर्ट का स्पष्ट निर्देश और अंतिम मौका
सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने स्पष्ट किया कि यह अंतिम मौका है। यदि निर्धारित समय में जवाब नहीं दिया गया, तो प्रतिवादियों के अधिकार सीमित किए जा सकते हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी याचिका में कहा है कि निचली अदालत ने जांच एजेंसियों के खिलाफ की गई टिप्पणियों को अनावश्यक बताया है। ईडी का तर्क है कि ये टिप्पणियां सीबीआई (CBI) मामले से अप्रासंगिक थीं और बिना उनके पक्ष सुने ही की गईं। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन टिप्पणियों से उसकी साख को नुकसान पहुंच रहा है।
मामले की पृष्ठभूमि और अगली सुनवाई
इस पूरे प्रकरण में वह फैसला भी शामिल है जिसमें केजरीवाल और सिसोदिया को बरी कर दिया गया था। सीबीआई ने इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जबकि ईडी ने अदालत की टिप्पणियों को हटाने की मांग की है। वहीं, केजरीवाल और सिसोदिया ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अदालत से इस मामले की सुनवाई किसी अन्य पीठ में स्थानांतरित करने की भी याचिका दायर की है। अभी इस याचिका पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। अगली सुनवाई 22 अप्रैल को तय की गई है, जिसमें यह स्पष्ट होगा कि प्रतिवादी अपना जवाब दाखिल करते हैं या नहीं। इस समय यह मामला निचली अदालत की टिप्पणियों, जांच एजेंसियों की आपत्तियों और कानूनी प्रक्रियाओं के बीच एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है।











