दिल्ली की कुंवर सिंह कॉलोनी में जल संकट और स्वास्थ्य खतरे
पश्चिमी दिल्ली की प्रसिद्ध कुंवर सिंह कॉलोनी में हर दिन निर्धारित समय पर नल से पानी आता है, लेकिन पिछले दो महीनों से जो पानी इन नलों से निकल रहा है, उसे लोग अब पानी मानने से इनकार कर रहे हैं। पहले इसमें बदबू और रंगत का बदलाव होता था, और अब यह स्थिति भयावह हो चुकी है। लोग चिंतित हैं कि इस दूषित पानी को पीने से उनके स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ेगा, खासकर बच्चों के लिए यह खतरा और भी बड़ा हो गया है।
सिस्टम की खामोशी और शिकायतों का निराकरण न होना
दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के सोशल मीडिया पेज पर जाकर देखा जाए, तो शिकायतों का अंबार दिखाई देगा-बदबूदार पानी, सीवर का मिला-जुला पानी, और दूषित सप्लाई की शिकायतें। इन सबके बावजूद, कॉलोनी के निवासी कहते हैं कि इन शिकायतों का कोई समाधान नहीं निकला है। पानी का सिलसिला जारी रहा और सिस्टम की खामोशी भी। जब हमारी टीम ने कॉलोनी का दौरा किया, तो हर जगह वही बदबू और गंदगी नजर आई। एक व्यक्ति ने कंटेनर उठाकर बताया कि यह वही पानी है जो रोजाना मिलता है, और इसे पीना किसी के भी बस की बात नहीं है।
बच्चों और वयस्कों का स्वास्थ्य खतरे में
महिलाएं बोतलें और बाल्टियां लेकर पानी भरने के लिए इकट्ठा होती हैं, लेकिन उनका मकसद पानी दिखाना होता है, पीने के लिए नहीं। एक महिला ने बताया कि दो महीने से यही पानी आ रहा है, जिसमें सीवर जैसी बदबू है। दूसरी महिला ने तुरंत कहा कि इससे उल्टी, दस्त और पेट दर्द हो रहे हैं, और बच्चे भी बीमार पड़ रहे हैं। कई लोग कहते हैं कि पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था, लेकिन अब यह आम बात बन गई है।
बच्चों को भी समझाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि वे भी पानी सूंघकर तुरंत मुंह फेर लेते हैं और कहते हैं कि यह पीने लायक नहीं है। जब बच्चे भी पानी की गुणवत्ता को पहचानने लगें, तो यह गंभीर संकेत है कि स्थिति कितनी खराब हो चुकी है।
मेडिकल रिपोर्ट्स भी इस खतरे की पुष्टि कर रही हैं। उल्टी, दस्त, पेट के संक्रमण और लगातार होने वाले बीमारियों का सिलसिला जारी है। एक छोटा लड़का अपनी मां के बीमार होने का जिक्र करते हुए कहता है कि उन्हें गांव भेजना पड़ा। पास की मेडिकल दुकानों पर रोजाना ऐसे ही केस आते हैं, जिनमें उल्टी और दस्त शामिल हैं।
इसके बावजूद, अधिकारी शिकायतों को खारिज करते रहे हैं। एक निवासी ने बताया कि तीन बार दिल्ली जल बोर्ड के कर्मचारी आए, लेकिन हर बार उन्होंने कहा कि पानी सुरक्षित है।
बिल और बचाव के उपाय
यहां तक कि जिन घरों में दिल्ली जल बोर्ड के कर्मचारी रहते हैं, उनकी भी शिकायतें अनसुनी हैं। एक निवासी ने कहा कि उनके घर में भी पानी गंदा आ रहा है, फिर भी कोई सुनवाई नहीं हो रही। इस स्थिति में सवाल उठता है कि यदि सिस्टम के अंदर के लोग भी जवाब नहीं पा रहे हैं, तो फिर जनता की सुनवाई कौन करेगा?
गुस्सा और निराशा अब राजनीतिक स्तर पर भी पहुंच चुकी है। लोग अपने स्थानीय विधायक और स्वास्थ्य मंत्री से भी शिकायत कर रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई समाधान नहीं मिल रहा। कुछ लोग इस संकट को राजनीतिक बदलाव से जोड़ते हैं, जबकि असली समस्या यह है कि लोग खुद को पूरी तरह से छोड़ा हुआ महसूस कर रहे हैं।
अधिकारी बार-बार दावा करते हैं कि पानी सुरक्षित है, लेकिन हाल की रिपोर्टें दर्शाती हैं कि दिल्ली जल बोर्ड की 25 में से 23 लैब्स की NABL मान्यता समाप्त हो चुकी है। जब जांच ही भरोसेमंद नहीं है, तो फिर ‘पीने योग्य’ का दावा कैसे किया जा सकता है? यह सवाल अब हर नागरिक के मन में उठ रहा है।
क्या इस स्थिति में कोई बड़ा हादसा होने का इंतजार किया जा रहा है? इंदौर के भागीरथपुरा में हुई त्रासदी के बाद ही सिस्टम जागा था, और अब कुंवर सिंह कॉलोनी भी उसी भय के साथ इंतजार कर रही है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन इससे पहले कोई कदम उठाएगा या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार करेगा? यह संकट अब जीवन और मौत का सवाल बन चुका है।











