दिल्ली शराब नीति मामले में हाई कोर्ट को राहत
दिल्ली शराब नीति से जुड़े मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को दिल्ली हाई कोर्ट से महत्वपूर्ण राहत मिली है। ट्रायल कोर्ट द्वारा इन दोनों को बरी करने के फैसले के खिलाफ सीबीआई (CBI) ने अपील की थी, लेकिन कोर्ट ने दोनों आरोपियों को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर देने का आदेश दिया है। इस निर्णय से दोनों नेताओं को न्यायिक प्रक्रिया में आगे बढ़ने का मौका मिला है।
सीबीआई का आरोप और कोर्ट का निर्णय
सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को गलत बताते हुए कहा कि यह आदेश पूरी तरह से अनुचित है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि इस तरह का आदेश रिकॉर्ड पर एक भी सेकंड के लिए नहीं रहना चाहिए और जवाब दाखिल करने के लिए अधिक समय नहीं मिलना चाहिए। उनका तर्क था कि निचली अदालत का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध है, इसलिए विस्तृत जवाब की आवश्यकता नहीं है। वहीं, आरोपियों के वकीलों ने कहा कि उन्हें जवाब तैयार करने के लिए पर्याप्त समय चाहिए और कोई जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट का रुख और कोर्ट की प्रक्रिया
आम आदमी पार्टी के वकीलों ने कोर्ट को सूचित किया कि उन्होंने पहले ही इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि जब तक सुप्रीम कोर्ट से कोई औपचारिक आदेश नहीं मिल जाता, तब तक हाई कोर्ट इस मामले में आगे बढ़ेगा। कोर्ट ने सभी पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने का अवसर प्रदान किया है।
27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य 19 व्यक्तियों को बरी कर दिया था। कोर्ट ने सीबीआई की कहानी को पूरी तरह से काल्पनिक करार देते हुए कहा कि इसमें कोई भी भरोसेमंद सबूत नहीं है। कोर्ट ने यह भी माना कि बिना किसी कानूनी आधार के आरोपियों को मुकदमे का सामना कराना न्याय के हित में नहीं है।











