दिल्ली हाईकोर्ट ने तुर्कमान गेट हिंसा मामले में जमानत रद्द की
दिल्ली हाईकोर्ट ने तुर्कमान गेट क्षेत्र में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास हुई अवैध अतिक्रमण हटाने के दौरान हुई हिंसा के संदर्भ में आरोपी मोहम्मद उबेदुल्ला की जमानत को निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि निचली अदालत का जमानत आदेश संक्षिप्त, अस्पष्ट और बिना मजबूत कारणों के पारित किया गया था, जो कानूनी दृष्टि से मान्य नहीं है।
जमानत आदेश की खामियों पर हाईकोर्ट का कठोर रुख
न्यायमूर्ति प्रतीक जलान ने इस मामले में राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि आमतौर पर अदालत किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करने से बहुत सावधानी बरतती है। लेकिन यह मामला विशेष है, जिसमें जमानत आदेश क्रिप्टिक और बिना तर्क के जारी किया गया था। हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि निचली अदालत का जमानत आदेश पर्याप्त कारणों के अभाव में रद्द किया जाना चाहिए।
दस्तावेजों का सत्यापन और अभियोजन पक्ष का तर्क
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि जमानत के समर्थन में प्रस्तुत दस्तावेजों का संतोषजनक सत्यापन नहीं किया गया था। अदालत ने बताया कि इन दस्तावेजों में कई कमियां थीं, जिनके आधार पर सही तथ्यों का आकलन कर जमानत देना संभव नहीं था। अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए सीसीटीवी फुटेज और सह-आरोपी के खुलासे का हवाला दिया। आरोप है कि मोहम्मद उबेदुल्ला उन लोगों में शामिल था जिन्होंने पुलिस और नगर निगम कर्मियों को रोकने, पत्थरबाजी करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया। वहीं, आरोपी के वकील ने इसे फिशिंग एक्सपीडिशन करार देते हुए कहा कि उनके मुवक्किल को झूठा फंसाया गया है।









