दिल्ली में प्रदूषण मापने की व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल
हर साल दिवाली के बाद दिल्ली की हवा जहरीली हो जाती है, लेकिन इस बार चिंता प्रदूषण के स्तर से अधिक, प्रदूषण मापने वाली प्रणालियों की सटीकता को लेकर उठ रही है। आजतक के रियलिटी चेक में राजधानी के कई इलाकों में एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन (AQI स्टेशन) और डिस्प्ले बोर्ड या तो खराब पाए गए हैं या फिर पेड़ों के बीच इस तरह लगाए गए हैं कि सही आंकड़े प्राप्त करना संभव नहीं है। सरकारी वेबसाइटों पर दिख रहे आंकड़ों और जमीन पर मिली हकीकत में भी गंभीर खामियां देखी गई हैं।
प्रदूषण मापने वाली मशीनें और डिस्प्ले बोर्ड की खराब स्थिति
दिल्ली के नरेला क्षेत्र में आईटीआई परिसर में स्थापित एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन का दृश्य अत्यंत चिंताजनक है। यह स्टेशन पेड़ों के बीच लगाया गया है, जहां हवा पहले से ही स्वच्छ रहती है। इसके ठीक सामने ही एंटी-स्मोक गन का प्रयोग हो रहा था, यानी प्रदूषण मापने से पहले ही हवा को साफ कर दिया गया। दिवाली के बाद सफाई अभियान चलाकर धूल के कण कम करने का प्रयास किया गया, ताकि रिपोर्ट बेहतर दिखे। डिस्प्ले बोर्ड इतना धुंधला है कि उस पर कोई भी डेटा स्पष्ट रूप से पढ़ना संभव नहीं है। स्थानीय एमसीडी कर्मचारी दयाचंद ने बताया कि दो दिन पहले से ही यहां सफाई का काम शुरू किया गया है।
कई स्थानों पर मशीनें और डिस्प्ले बोर्ड बंद या खराब
आया नगर में मौसम विज्ञान विभाग के कार्यालय के बाहर पिछले 18 महीनों से AQI का डिस्प्ले बोर्ड बंद पड़ा है। गार्ड ने बताया कि मशीन काफी समय से काम नहीं कर रही है, जबकि अंदर की मशीनें सक्रिय होने का दावा किया जाता है, लेकिन बाहरी लोगों का वहां प्रवेश वर्जित है। इससे स्पष्ट है कि जनता तक पहुंचने वाला प्रदूषण का डेटा केवल विभागीय फाइलों तक सीमित है। इसी तरह आरके पुरम के केंद्रीय विद्यालय परिसर में भी AQI डिस्प्ले बोर्ड छत पर पेड़ों से ढका हुआ है और 22 अक्टूबर से बंद पड़ा है। बवाना क्षेत्र में भी स्टेशन पेड़ों के बीच लगा है, लेकिन डिस्प्ले खराब है। पश्चिमी दिल्ली के पंजाबी बाग में भी मशीन बंद है, जबकि वेबसाइट पर AQI 300+ दिख रहा है। कड़कड़डूमा और शाहदरा जैसे इलाकों में भी मॉनिटरिंग सिस्टम खराब या बंद पड़ा है। इन सभी स्थानों पर प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है, लेकिन आंकड़ों में फर्क दिख रहा है।










