दिल्ली में वायु प्रदूषण का बढ़ता संकट
नवंबर के आते ही दिल्ली की वायु गुणवत्ता गंभीर स्तर पर पहुंचने लगी है, जिससे शहर की हवा जहरीली हो रही है। अक्टूबर की हल्की धुंध अब घने स्मॉग का रूप ले चुकी है, जिससे सांस लेना भी कठिन हो गया है। प्रदूषण के स्तर में निरंतर वृद्धि हो रही है और इस बार भी स्थिति में कोई सुधार नहीं दिख रहा है। खेतों में पराली जलाने, वाहनों और फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं के साथ मिलकर दिल्ली को फिर से ‘गैस चैंबर’ बना दिया है।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए नई सरकारी नीतियां
प्रदूषण की बढ़ती समस्या को देखते हुए कमिशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने नए सख्त कदम उठाए हैं। एक नवंबर से दिल्ली में पुराने डीजल ट्रक और BS-VI मानकों का पालन न करने वाले वाणिज्यिक वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके साथ ही ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत निर्माण गतिविधियों से निकलने वाली धूल, फैक्ट्रियों से उत्सर्जित धुआं और डीजल जेनरेटर के उपयोग पर भी रोक लगाई जा रही है।
पराली जलाने का प्रभाव और उसकी बढ़ती घटनाएं
दिल्ली की जहरीली हवा का मुख्य कारण शहर के बाहर पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं हैं। इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टिट्यूट (IARI) के आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से नवंबर तक खेतों में आग लगाने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। 2023 में पंजाब में अक्टूबर में 7,459 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज हुईं, जो नवंबर में बढ़कर 28,990 हो गईं। हरियाणा में भी यह संख्या लगभग समान रही। हालांकि 2024 में पराली जलाने के मामलों में कमी आई है, लेकिन अक्टूबर 2024 में दिल्ली का औसत AQI 234 था, जो नवंबर में बढ़कर 374 तक पहुंच गया।
हर साल की तरह फिर से खतरा मंडरा रहा है
इस वर्ष भी दिल्ली के हालात पिछले वर्षों जैसी ही हैं। अक्टूबर में ही कई दिनों तक हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज हुई है। यदि यह रुझान जारी रहा, तो नवंबर महीना दिल्ली के लिए फिर से सांस लेने में कठिनाई और जहरीली हवा का महीना साबित हो सकता है। साफ शब्दों में कहें, तो जैसे ही नवंबर आता है, दिल्ली की हवा हर साल जहरीली हो जाती है। खेतों में पराली जलाने, शहर की धूल, निर्माण कार्य, वाहनों का धुआं और ठंडी हवा मिलकर दिल्ली को हर साल गैस चैंबर में बदल देते हैं।











