दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) को स्पष्ट रूप से फटकार लगाते हुए कहा कि यह संस्था न तो प्रदूषण के मुख्य कारणों की सही पहचान कर पा रही है और न ही दीर्घकालिक समाधान प्रस्तुत कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि इस समस्या का समाधान खोजने में और देरी हुई, तो इससे भविष्य में और भी जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं।
प्रदूषण के कारणों की पहचान और विशेषज्ञों की भूमिका पर कोर्ट का निर्देश
मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान कहा कि एक विशेषज्ञ निकाय होने के नाते CAQM की प्राथमिक जिम्मेदारी यह है कि वह यह स्पष्ट करे कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के मुख्य कारण क्या हैं। समाधान का चरण बाद में आएगा, लेकिन कारणों की सही पहचान के बिना कोई ठोस योजना संभव नहीं है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि CAQM दो हफ्ते के भीतर विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की सूची तैयार करे और उनकी बैठक आयोजित करे। इन विशेषज्ञों के विचार-विमर्श के आधार पर AQI (वायु गुणवत्ता सूचकांक) के बिगड़ने के मुख्य कारणों पर एक रिपोर्ट बनाकर सार्वजनिक की जाए।
प्रदूषण के कारणों को सार्वजनिक करने और दीर्घकालिक समाधान पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण के मुख्य कारणों को जनता के बीच लाना जरूरी है ताकि आम लोग भी समस्या की जड़ को समझ सकें और अपने स्तर पर सुझाव दे सकें। कोर्ट ने यह भी कहा कि विशेषज्ञ यह स्पष्ट करें कि कौन से कारण सबसे अधिक प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं, ताकि उन पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जा सके। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि अक्सर पूरे प्रदूषण का दोष किसानों और पराली जलाने पर डाल दिया जाता है, जबकि कोरोना काल के दौरान पराली जलने के बावजूद दिल्ली का आकाश अपेक्षाकृत साफ था। कोर्ट ने कहा कि बसों और ट्रकों को प्रदूषण का मुख्य कारण मानना आसान है, लेकिन यदि सार्वजनिक परिवहन बंद कर दिया जाए तो आम जनता की आवाजाही कैसे होगी? इसलिए दीर्घकालिक योजना और व्यवहारिक विकल्पों पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही CAQM को निर्देश दिया कि वह टोल प्लाजा और उससे जुड़े प्रदूषण के मुद्दे पर भी विचार करे। इससे पहले नगर निगम ने टोल को राजस्व का महत्वपूर्ण स्रोत बताते हुए इसे जारी रखने का तर्क दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि विशेषज्ञ टोल प्लाजा को प्रदूषण का कारण मानते हैं, तो उस पर भी ठोस कदम उठाने होंगे। अंत में, अदालत ने कहा कि वह स्वयं विशेषज्ञ बनने का दावा नहीं करता, लेकिन विशेषज्ञों के बीच गंभीर विमर्श के लिए एक मजबूत मंच उपलब्ध कराएगा। साथ ही, CAQM को निर्देश दिया गया कि वह प्रदूषण के कारणों की पहचान के साथ-साथ दीर्घकालिक समाधान पर भी समानांतर काम शुरू करे और उन्हें चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना प्रस्तुत करे।









