सशस्त्र बलों में आत्महत्या और इस्तीफे की चिंताजनक प्रवृत्ति
सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि पिछले तीन वर्षों में केंद्रीय सशस्त्र बलों (CAPFs), असम राइफल्स और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) में कुल 438 आत्महत्याओं और सात फ्रैट्रिसाइड के मामले दर्ज हुए हैं। इसके अलावा, 2014 से 2025 के बीच लगभग 23,360 जवानों ने अपनी नौकरी से इस्तीफा दिया है। सरकार ने इन आंकड़ों के साथ ही जवानों के लिए उपलब्ध छुट्टियों और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की भी जानकारी साझा की है।
आत्महत्याओं और इस्तीफों में बढ़ोतरी चिंता का विषय
आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक आत्महत्याएं केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में हुई हैं, जहां तीन वर्षों में 159 जवानों ने अपनी जान ली। इसके बाद सीमा सुरक्षा बल (BSF) में 120 और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में 60 आत्महत्याओं का मामला सामने आया है। वहीं, इस्तीफों का आंकड़ा भी चिंता बढ़ाने वाला है। 2014 से 2025 के बीच, इन बलों से कुल 23,360 जवानों ने सेवा छोड़ दी है, जिनमें से सबसे अधिक 7,493 इस्तीफे बीएसएफ से हुए हैं। इसके बाद CRPF से 7,456 और CISF से 4,137 जवानों ने अपने पद छोड़ दिए। वर्ष 2025 में अब तक 3,077 जवानों ने इस्तीफा दिया है, जिनमें से 1,157 बीएसएफ से हैं।
मनोवैज्ञानिक सहायता और सेवा शर्तें
सेवा शर्तों पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने बताया कि अधिकांश CAPF जवान आठ घंटे की शिफ्ट में काम करते हैं, हालांकि आवश्यकतानुसार ड्यूटी का समय बदलता रहता है। जवानों को फील्ड में तैनाती के दौरान साल में 75 दिनों की छुट्टियों का प्रावधान है, जिसमें 60 दिन की अर्जित छुट्टियां और 15 दिन की कैजुअल लीव शामिल हैं। सरकार ने जवानों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए मनोरोग सेवाएं, तनाव प्रबंधन कार्यक्रम, योग और ध्यान सत्र भी शुरू किए हैं, ताकि उनके मनोबल को मजबूत किया जा सके।











