दिल्ली में शर्टलेस प्रोटेस्ट की सुरक्षा चूक का मामला
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामी सामने आई है, जब शर्टलेस प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस की नजरअंदाजी को चुनौती दी। इस घटना को लेकर अब तक पांच मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि कई संदिग्धों से पूछताछ जारी है। पटियाला हाउस कोर्ट ने इन आरोपियों में से चार की जमानत याचिका खारिज कर दी है और उन्हें पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा है।
गिरफ्तारियों और पूछताछ का क्रम जारी
ग्वालियर के सिटी सेंटर से गिरफ्तार किए गए जितेंद्र सिंह यादव को दिल्ली पुलिस ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट कौतुक भारद्वाज के समक्ष पेश किया। पुलिस ने पांच दिन की रिमांड की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने केवल दो दिन की पुलिस कस्टडी मंजूर की। इस मामले में यूथ कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को भी हिरासत में लिया गया है। खासतौर पर भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कृष्णा हरि को इस प्रदर्शन का मुख्य रणनीतिकार माना जा रहा है, जो संगठन के राष्ट्रीय स्तर पर काम देखते हैं।
आरोपियों की भूमिका और जांच का दायरा
गिरफ्तारियों में उत्तर प्रदेश और बिहार के युवा नेताओं का भी नाम शामिल है। इनमें यूपी युवा कांग्रेस के प्रमुख अजय कुमार और दक्षिण भारत से नरसिम्हा यादव भी शामिल हैं। खास बात यह है कि संगठन के राष्ट्रीय समन्वयक जितेंद्र सिंह यादव को 22 फरवरी को ग्वालियर से हिरासत में लिया गया। जांच में पता चला कि उन्होंने 16 फरवरी को ही दिल्ली पहुंचकर हिमाचल भवन में रुकने के साथ-साथ भारत मंडपम (ITPO) की रेकी भी की थी।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और क्राइम ब्रांच इस मामले में सक्रिय हैं। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में छापेमारी जारी है, जिसमें ग्वालियर से राजा गुर्जर, भिंड से बिमल, झांसी से प्रद्युम्न और ललितपुर से बंटी शुक्ला को हिरासत में लिया गया है। साथ ही, पुलिस उन स्थानों की भी जांच कर रही है जहां विवादित टी-शर्ट्स पर ‘Compromised PM’ लिखा गया था।
पुलिस का मुख्य ध्यान इन घटनाओं के पीछे की योजना और वित्तीय स्रोतों पर है। अतिरिक्त सीपी देवेश महला के अनुसार, जांच का मुख्य फोकस सुरक्षा व्यवस्था में हुई सेंध, आयोजन के लिए धन का स्रोत और क्या यह देश की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचाने की कोई बड़ी साजिश का हिस्सा था।










