दिल्ली में आवारा कुत्तों से जुड़ी सरकारी नीति पर राजनीतिक विवाद
दिल्ली में आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर सरकार की नई पहल अब राजनीतिक बहस का विषय बन गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने सवाल उठाया है कि क्या शिक्षकों को अब पढ़ाने के बजाय आवारा कुत्तों की गिनती का काम सौंपा जा रहा है। इस मुद्दे पर विपक्ष और सरकार के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिल रही है।
आरोप-प्रत्यारोप और सरकारी प्रतिक्रिया
AAP के नेता सौरभ भारद्वाज सहित तीन नेताओं पर सांता क्लॉज के अपमान का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल सरकार में शिक्षकों को विदेश भेजकर प्रशिक्षण दिया जाता था, जबकि वर्तमान सरकार में उन्हें आवारा कुत्तों की गिनती के लिए लगाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि यह आदेश अधिकारियों ने अपने स्तर पर लिया है तो सरकार को इसकी जानकारी होनी चाहिए।
वहीं, दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि रोज नए झूठ फैलाने से जनता का भरोसा नहीं जीता जा सकता। यदि सरकार का कोई आदेश है तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष की यह राजनीति बौखलाहट में की जा रही है और जनता पहले ही पार्टी को खारिज कर चुकी है।
क्या है असली आदेश और उसकी स्थिति?
दिल्ली सरकार ने अपने स्कूल परिसरों के आसपास आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों के समाधान के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति का निर्देश दिया है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए उठाया गया है। हालांकि, शिक्षा निदेशालय (DoE) ने स्पष्ट किया है कि शिक्षकों को किसी विशेष जिम्मेदारी नहीं दी गई है। सोमवार को जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि शिक्षकों को किसी खास ड्यूटी का निर्देश नहीं दिया गया है।
5 दिसंबर को जारी सर्कुलर में, शिक्षा निदेशालय की केयरटेकिंग ब्रांच ने जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया था कि वे आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों के लिए नोडल अधिकारी नामित करें और उनकी जानकारी शिक्षा निदेशालय को भेजें। इन जानकारियों को संकलित कर मुख्य सचिव को भेजा जाएगा।
विपक्षी शिक्षकों के संगठनों ने इस फैसले का विरोध किया है। उनका तर्क है कि इस तरह की जिम्मेदारियों से पढ़ाई पर असर पड़ेगा, खासकर जब कई स्कूलों में प्री-बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं।









