बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का परिणाम और राजनीतिक बदलाव
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों ने न केवल राजनीतिक विशेषज्ञों को चौंका दिया, बल्कि उन सभी अटकलों को भी खारिज कर दिया जिनमें नीतीश कुमार को ‘चूक और गफलतों’ का शिकार बताया जा रहा था। चुनाव से पहले नीतीश कुमार की स्थिति राजनीतिक रूप से कमजोर मानी जा रही थी। सार्वजनिक मंचों पर उनकी गलतियों, अजीबोगरीब मौन, प्रोटोकॉल तोड़ने और जुबान फिसलने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे थे।
नीतीश कुमार की छवि और विपक्षी आलोचनाएँ
विपक्षी दलों ने नीतीश कुमार की बढ़ती उम्र और उनके सार्वजनिक व्यवहार को बिहार का ‘जो बाइडेन’ कहकर प्रचारित किया था। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और जन सुराज के प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार की मानसिक फिटनेस पर सवाल उठाए और साथ ही 20 साल की सत्ता-विरोधी लहर का मुद्दा भी उठाया। लेकिन जब जनता का फैसला आया, तो ‘सुशासन बाबू’ की छवि उनके व्यक्तिगत विवादों से कहीं अधिक मजबूत साबित हुई। यह सब उस काम का परिणाम है, जो नीतीश कुमार ने जमीन पर उतारा। बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य के अपराध प्रोफाइल में बड़ा बदलाव आया है। जिन अपराधों के कारण बिहार को पहले ‘जंगल राज’ कहा जाता था, वे अब अपने उच्चतम स्तर से काफी नीचे आ चुके हैं।
बिहार में अपराध और कानून-व्यवस्था में सुधार
2001 से 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, बिहार में गंभीर हिंसक अपराधों में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है। हत्या के मामलों में, जो पहले हर साल 3000 से ऊपर रहते थे, अब यह संख्या घटकर 2556 रह गई है, जो पिछले 25 वर्षों का सबसे निचला स्तर है। डकैती के मामलों में भी 80 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है, जो 2000 के शुरुआती वर्षों में 1200 से अधिक थीं, अब सिर्फ 174 रह गई हैं। दंगा मामलों की संख्या 2014 में 13566 के शिखर पर पहुंच गई थी, जो अब घटकर 2502 पर आ गई है। यह आंकड़ा 2001 के बाद सबसे कम है। इन बदलावों ने बिहार के आम नागरिकों के जीवन में सुरक्षा का भरोसा जगाया है। कम डकैतियां, जातीय संघर्ष में कमी और भयमुक्त रातें लोगों के मन में सुरक्षा का भाव पैदा कर रही हैं।











