बिहार में विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग स्थापित होने का उत्साह
बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया नगर में स्थित विराट रामायण मंदिर परिसर में इन दिनों एक अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। यहाँ दुनिया का सबसे बड़ा 33 फीट लंबा शिवलिंग श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मंदिर में पहुंचते ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है, जो सुबह से लेकर शाम तक भगवान शिव के दर्शन कर रहे हैं।
शिवलिंग की यात्रा और उसकी विशेषताएँ
यह विशाल शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम (Mahabalipuram) से लगभग 47 दिनों की यात्रा के बाद केसरिया पहुंचा है। यात्रा के दौरान, जहां-जहां 96 पहियों वाले ट्रक रुका, वहां श्रद्धालुओं की भीड़ जमा हो गई। बिहार में प्रवेश करने के बाद यह शिवलिंग गोपालगंज से डुमरिया पुल के रास्ते सोमवार रात विराट रामायण मंदिर में स्थापित किया गया। इसके बाद से मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। बुधवार को एसडीएम शिवानी शुभम ने मंदिर का निरीक्षण किया और शिवलिंग स्थापना से जुड़ी तैयारियों की समीक्षा की। अधिकारियों ने जल्द से जल्द शेष कार्य पूरे करने का निर्देश दिया है।
शिवलिंग स्थापना की तैयारियां और धार्मिक अनुष्ठान
शिवलिंग की स्थापना के लिए भोपाल से 750 टन क्षमता वाला विशाल क्रेन मंगवाया गया है। 17 जनवरी को पीठ पूजन के बाद विशेषज्ञों की निगरानी में इसे मंदिर में स्थापित किया जाएगा, जिसमें तीन से चार घंटे का समय लग सकता है। स्थापना से पहले मंदिर परिसर में अस्थायी मंडप का निर्माण किया जा रहा है, जहां विधिवत पूजा-पाठ किया जाएगा। इस खास अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। साथ ही, शिवलिंग पर पुष्प वर्षा के लिए हेलीकॉप्टर भी मंगाया गया है। अयोध्या से पंडितों को आमंत्रित किया गया है, जो विधिवत धार्मिक अनुष्ठान करेंगे। शिवलिंग का जलाभिषेक हरिद्वार, प्रयागराज, गंगोत्री, कैलाश मानसरोवर और सोनपुर जैसी पवित्र नदियों के जल से किया जाएगा। यह शिवलिंग ‘सहस्त्रलिंगम’ नामक है, जिसमें 1008 छोटे शिवलिंग अंकित हैं, और इसके जलाभिषेक से 1008 शिवलिंग का पुण्य फल प्राप्त होता है। यह 210 मीट्रिक टन वजनी मोनोलिथ (monolith) ब्लैक ग्रेनाइट पत्थर से बना है, जिसे तमिलनाडु के महाबलीपुरम के कलाकारों ने लगभग 10 वर्षों में तैयार किया है।











