बिहार विधानसभा चुनाव में सियासी रणनीति का नया मोड़
बिहार विधानसभा चुनाव की जंग में राजनीतिक दल अपने-अपने दांव-पेंच आजमा रहे हैं। इस बार आरजेडी (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव के उत्तराधिकारी और नेता तेजस्वी यादव ने अपने बड़े भाई तेज प्रताप यादव की चचेरी बहन करिश्मा राय को परसा विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है। यह कदम राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
करिश्मा राय बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री दरोगा प्रसाद राय की पौत्री हैं। दरोगा राय का परिवार बिहार की राजनीति में प्रभावशाली रहा है। तेज प्रताप की शादी ऐश्वर्या राय से हुई थी, लेकिन कुछ समय बाद उनके बीच मतभेद उभर आए और मामला अदालत तक पहुंच गया। इस विवाद के कारण लालू परिवार ने पहले करिश्मा को टिकट नहीं दिया था।
राजनीतिक विरासत और परिवारिक समीकरण
दरोगा प्रसाद राय का राजनीतिक प्रभाव बिहार की परसा सीट पर सदियों से रहा है। 1952 में पहली बार इस सीट से विधायक चुने गए दरोगा राय ने 1970 में मुख्यमंत्री पद संभाला। उनके पुत्र चंद्रिका राय ने भी इस सीट पर अपनी पहचान बनाई। 2015 में चंद्रिका राय आरजेडी से विधायक चुने गए, लेकिन बाद में जेडीयू (JDU) में लौट आए।
तेज प्रताप यादव और ऐश्वर्या राय के बीच विवाद के कारण लालू परिवार ने करिश्मा राय को टिकट नहीं दिया था। हालाँकि, अब तेजस्वी यादव ने इस सीट पर करिश्मा राय को उम्मीदवार बनाकर अपने राजनीतिक समीकरणों को मजबूत करने का प्रयास किया है। यह कदम जेडीयू (JDU) के साथ मुकाबले को और दिलचस्प बना रहा है।
सियासी दांव और क्षेत्रीय समीकरण
परसा सीट पर इस बार मुकाबला खासा दिलचस्प होने की उम्मीद है। पूर्व मुख्यमंत्री दरोगा प्रसाद राय का प्रभाव इस क्षेत्र में अभी भी कायम है। 2020 के विधानसभा चुनाव में उनके पुत्र चंद्रिका राय जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़े थे। अब 2025 के चुनाव में जेडीयू और आरजेडी के बीच मुकाबला और भी कड़ा होने की संभावना है।
तेजस्वी यादव ने करिश्मा राय को उम्मीदवार बनाकर अपने सियासी संदेश को स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने यह संकेत दिया है कि पार्टी अब उन नेताओं से दूरी बनाएगी, जिनसे व्यक्तिगत विवाद के कारण पहले दूरी बनी थी। इस कदम से यादव वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति भी नजर आ रही है।
यादव समुदाय और चुनावी समीकरण
बिहार में यादव समुदाय का वोट लगभग 15 प्रतिशत है, जो ओबीसी (OBC) वर्ग में सबसे बड़ा समूह माना जाता है। यादव वोटर परंपरागत रूप से आरजेडी का समर्थन करते आए हैं। तेज प्रताप यादव के विवादित व्यवहार और व्यक्तिगत मामलों से यादव समाज में नाराजगी की खबरें भी सामने आई थीं।
करिश्मा राय को उम्मीदवार बनाकर तेजस्वी यादव ने यादव समुदाय की नाराजगी को दूर करने का प्रयास किया है। यह कदम क्षेत्रीय राजनीति में नए समीकरण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण रणनीति माना जा रहा है।











