क्या हर घर के सदस्य को सरकारी नौकरी देना संभव है?
तेजस्वी यादव ने चुनाव जीतने के बाद एक बड़ा वादा किया है कि वे प्रत्येक घर के एक सदस्य को सरकारी नौकरी प्रदान करेंगे। हालांकि, इस वादे को पूरा करना वर्तमान आंकड़ों के अनुसार लगभग असंभव प्रतीत होता है। बिहार में लगभग 2.63 करोड़ परिवार ऐसे हैं जिनके पास कोई सरकारी नौकरी नहीं है। इसका अर्थ है कि तेजस्वी को केवल 20 महीनों में इन सभी परिवारों के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देना होगा।
आंकड़ों और चुनौतियों का विश्लेषण
बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने वर्ष 2023-24 में पूरे एक साल में केवल 4 लाख 29 हजार सरकारी नौकरियों के लिए भर्तियां निकाली हैं। इस हिसाब से, तेजस्वी यादव हर महीने लगभग 13 लाख नई सरकारी नौकरियों की भर्ती कैसे करेंगे, यह एक बड़ा सवाल है। यदि हम उनके पिछले आंकड़ों का विश्लेषण करें, तो उन्होंने कहा कि उन्होंने 17 महीनों में 5 लाख लोगों को सरकारी नौकरी दी। इसका मतलब है कि उन्होंने हर महीने लगभग 29 हजार भर्तियां की हैं। यदि इसी गति से भी बिहार के हर परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए, तो इसमें लगभग 74 साल लगेंगे। उस समय तक तेजस्वी यादव 109 वर्ष के हो चुके होंगे और उन्हें लगातार 74 साल तक बिहार की सत्ता में रहना पड़ेगा।
आर्थिक और योग्यता संबंधी चिंताएँ
यदि मान लें कि इन सरकारी नौकरियों का औसत मासिक वेतन कम से कम 25 हजार रुपये है, तो सरकार को हर साल लगभग 7 लाख 88 हजार करोड़ रुपये की राशि चाहिए होगी। वर्तमान में बिहार का कुल बजट लगभग 3 लाख 16 हजार करोड़ रुपये है, जो इस आवश्यक राशि का आधा भी नहीं है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि तेजस्वी यादव का यह वादा आर्थिक और व्यावहारिक दृष्टि से संभव नहीं है।
सवाल यह भी उठता है कि क्या ये नौकरियां बिना योग्यता के दी जाएंगी, और इन नौकरियों का आधार क्या होगा। यदि किसी परिवार में कोई शिक्षित या युवा नहीं है, तो उन्हें सरकारी नौकरी कैसे दी जाएगी? ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब तेजस्वी यादव ही दे सकते हैं। बिहार में 15 से 29 वर्ष के युवाओं की आबादी 28 प्रतिशत से अधिक है, और संभव है कि इस वादे का प्रभाव इन युवाओं पर पड़े और यह चुनावी मुद्दा बन जाए।











