सीमांचल क्षेत्र को केंद्र शासित प्रदेश बनाने पर सांसद का रुख
बिहार और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को मिलाकर सीमांचल क्षेत्र को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की चर्चा के बीच कांग्रेस सांसद डॉक्टर जावेद आजाद ने स्पष्ट किया है कि वह इस प्रस्ताव के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि इस क्षेत्र को स्वतंत्र राज्य का दर्जा दिया जाता है, तो वह इसका समर्थन करेंगे।
किशनगंज में पत्रकारों से बातचीत के दौरान सांसद ने कहा कि वह पहले से ही सीमांचल को केंद्र शासित प्रदेश नहीं बल्कि एक अलग राज्य बनाने की मांग उठाते आए हैं। उनका तर्क है कि पटना में बैठी सरकार और प्रशासन का ध्यान सीमांचल की समस्याओं तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाता है।
सीमांचल को स्वतंत्र राज्य बनाने की मांग और विकास का रास्ता
सांसद ने जोर देते हुए कहा कि यदि सीमांचल को अलग राज्य का दर्जा दिया जाता है, तो इससे क्षेत्र के विकास में तेजी आएगी और स्थानीय लोगों की स्थिति में सुधार होगा। उन्होंने यह भी बताया कि वह पहले भी संसद में इस मांग को उठा चुके हैं।
अपने तर्क को मजबूत करने के लिए उन्होंने झारखंड का उदाहरण भी दिया। कहा कि जब तक झारखंड बिहार का हिस्सा था, वहां का विकास अपेक्षा के अनुरूप नहीं था, लेकिन स्वतंत्र राज्य बनने के बाद वहां विकास के संकेत स्पष्ट रूप से दिखने लगे हैं। यदि बिहार के आठ जिलों को अलग कर सीमांचल राज्य बनाया जाता है, तो इस क्षेत्र के विकास के नए द्वार खुल सकते हैं।
राजनीतिक समीकरण और केंद्र सरकार पर आरोप
सांसद ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि 2026 में उनके राज्यसभा चुनाव लड़ने की चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई नेताओं ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि नीतीश कुमार ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री को हटाने की साजिश के तहत उन्हें राज्यसभा भेजने की तैयारी की जा रही है, जो जनता के मत के साथ धोखा है।
सांसद ने यह भी कहा कि बिहार की जनता ने भाजपा के साथ मिलकर नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाने का जनादेश दिया था, लेकिन भाजपा ने उस भरोसे को तोड़ दिया है।
इसके साथ ही, जावेद आजाद ने पश्चिम बंगाल में मतदाता पुनरीक्षण को लेकर केंद्र सरकार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह राजनीति के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से मंत्रियों के नाम काटे जाने की खबरें सामने आई हैं, जो अत्यंत निंदनीय हैं।









