भारतीय जनता पार्टी में बड़े बदलाव और नई नियुक्तियां
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने हाल ही में अपने संगठनात्मक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिसमें नई नियुक्तियों का दौर शुरू हुआ है। पार्टी ने अपने कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन (Nitin Nabin) को पदोन्नत किया है और बिहार में संगठन की कमान भी बदली गई है। इस क्रम में बीजेपी ने दिलीप जायसवाल (Dilip Jaiswal) की जगह संजय सरावगी (Sanjay Sarawagi) को प्रदेश अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया है।
संजय सरावगी एक अनुभवी नेता हैं, जिन्होंने पार्टी के साथ-साथ सरकार में भी अपनी छवि बनाई है। वे पांच बार के विधायक होने के साथ ही संगठन और प्रशासन दोनों का व्यापक अनुभव रखते हैं। इस बदलाव के साथ ही बिहार बीजेपी ने अपने संगठन को मजबूत करने का संकेत दिया है, जिससे आगामी चुनावों में उसकी स्थिति और बेहतर हो सकती है।
संजय सरावगी का राजनीतिक सफर और प्रमुख उपलब्धियां
संजय सरावगी का राजनीतिक जीवन छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से शुरू हुआ, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का ही एक हिस्सा है। इसके बाद उन्होंने निगम पार्षद के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की। उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और धीरे-धीरे अपनी सियासी पकड़ मजबूत की। विधायक बनने से लेकर मंत्री पद तक का सफर तय करने वाले सरावगी को अब बिहार का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है।
उनका जन्म 28 अगस्त 1969 को दरभंगा (Darbhanga) के मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम परमेश्वर सरावगी है। उन्होंने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (Lalit Narayan Mithila University) से उच्च शिक्षा प्राप्त की, जिसमें एमकॉम और एमबीए की डिग्री शामिल है। वे महात्मा गांधी कॉलेज (Mahatma Gandhi College) के शासी निकाय के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
संजय सरावगी ने अपनी राजनीतिक शुरुआत छात्र संगठन से की थी। 1990 में समस्तीपुर (Samastipur) में लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) की गिरफ्तारी के विरोध में प्रदर्शन के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद उन्हें 15 दिनों तक जेल में रहना पड़ा। 1995 में उन्होंने बीजेपी की सदस्यता ली और युवा मोर्चा (Yuva Morcha) से जुड़कर संगठन में विभिन्न पदों पर कार्य किया।
राजनीतिक सफर और संगठनात्मक अनुभव
संजय सरावगी ने नगर निगम के पार्षद के रूप में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। 2000 में दरभंगा (Darbhanga) के वार्ड से पार्षद चुने गए और फिर 2002 में नगरपालिका चुनाव में भी जीत हासिल की। 2005 में उन्हें दरभंगा नगर सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने का मौका मिला, और उन्होंने लगातार छह बार इस सीट से जीत दर्ज की।
वह फरवरी 2005, नवंबर 2005, 2010, 2015, 2020 और 2025 में विधायक चुने गए हैं। पिछली सरकार में उन्हें मंत्री पद भी मिला था, जहां उन्होंने मैथिली भाषा में पद और गोपनीयता की शपथ ली थी। उनके संगठनात्मक कौशल और राजनीतिक अनुभव ने उन्हें पार्टी में एक मजबूत नेता के रूप में स्थापित किया है।
संजय सरावगी वैश्य समुदाय से आते हैं, जो बिहार और मिथिला क्षेत्र में बीजेपी का महत्वपूर्ण वोटबैंक माना जाता है। वे व्यापारिक वर्ग में अच्छी पकड़ रखते हैं। उनके संगठनात्मक कौशल और क्षेत्रीय प्रभाव के कारण ही उन्हें पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष के रूप में चुना है। इस नियुक्ति के साथ ही बीजेपी ने अपने परंपरागत वैश्य समाज को सियासी संदेश देने का प्रयास किया है।











