राबड़ी देवी के आवास के बाहर हंगामे की घटनाएं
मंगलवार को राबड़ी देवी के आवास के बाहर राजद समर्थकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। मसौढ़ी से विधायक रेखा पासवान का टिकट काटने की मांग को लेकर समर्थकों ने नारेबाजी की और आवास के दोनों ओर भारी तनाव पैदा कर दिया।
समर्थकों का कहना था कि उन्होंने लालू यादव को अपनी बात पहुंचा दी है और चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं हुई, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। यह कोई पहली बार नहीं है जब इस तरह का हंगामा हुआ हो। कुछ दिन पहले ही मखदुमपुर से विधायक सतीश कुमार का टिकट काटने की मांग को लेकर भी समर्थक लालू-राबड़ी के आवास में घुस गए थे और जमकर हंगामा किया था।
पार्टी के अंदर असंतोष और विरोध की स्थिति
राजद नेतृत्व इस स्थिति को लेकर चिंतित है और समर्थकों को शांत करने का प्रयास कर रहा है। टिकट वितरण और आगामी चुनावी रणनीति को लेकर पार्टी के भीतर विरोध और असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। समर्थकों का गुस्सा और हंगामा इस बात का संकेत है कि पार्टी में टिकट और सीटों को लेकर संघर्ष जारी है, जिसे संभालना पार्टी नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
हाल ही में, बिहार के मखदुमपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक सतीश कुमार के खिलाफ भी स्थानीय लोगों ने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के सरकारी आवास पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि सतीश कुमार ने अपने कार्यकाल में क्षेत्र के विकास की उपेक्षा की और जनता की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया।
स्थानीय जनता का विरोध और उम्मीदवार चयन पर प्रभाव
प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए स्पष्ट किया कि वे ऐसे विधायक को नहीं चाहते, जिसे उन्होंने ‘चोर विधायक’ कहकर नकारा। उन्होंने पार्टी नेतृत्व से अपील की कि आगामी चुनाव में सतीश कुमार को टिकट न दिया जाए और किसी ऐसे उम्मीदवार को मौका दिया जाए जो क्षेत्र और जनता की भलाई के लिए काम करे।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पार्टी ने सतीश कुमार को फिर से टिकट दिया, तो जनता इसका विरोध करेगी और पार्टी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। प्रदर्शनकारियों ने जोर देकर कहा कि चुनाव में क्षेत्र के विकास और जनता के हितों को ध्यान में रखकर ही उम्मीदवार का चयन किया जाना चाहिए।
यह घटना दर्शाती है कि मखदुमपुर के लोग अपने प्रतिनिधि की जवाबदेही और प्रदर्शन को लेकर बहुत जागरूक हैं। यह स्थिति राजद के टिकट वितरण और उम्मीदवार चयन के मुद्दे पर एक बड़ी चुनौती बन सकती है, क्योंकि स्थानीय जनता अपनी मांगें सीधे पार्टी नेतृत्व तक पहुंचाने से नहीं हिचकिचाती।










