बिहार सरकार का नया कदम: राजस्व विभाग में पारदर्शिता और जनता की भागीदारी बढ़ाने की पहल
बिहार सरकार ने राजस्व प्रशासन को जनता के और अधिक करीब लाने और शिकायतों के निस्तारण को पारदर्शी बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब से सभी राजस्व पदाधिकारी हर सोमवार और शुक्रवार को अपने कार्यालय में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेंगे ताकि वे सीधे नागरिकों की समस्याओं को सुन सकें। यह नई व्यवस्था 19 जनवरी 2026 से प्रभावी होगी, जिससे जनता की शिकायतें तेजी से और प्रभावी ढंग से सुनी जाएंगी।
राजस्व विभाग की नई नीति का उद्देश्य और दिशा निर्देश
उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया कि राजस्व प्रशासन का मुख्य लक्ष्य केवल नियमों का पालन कराना नहीं है, बल्कि नागरिकों की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और सम्मानजनक समाधान सुनिश्चित करना है। इसी उद्देश्य से, सभी राजस्व अधिकारियों को हर सोमवार और शुक्रवार को कार्यालय में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। यह कदम 19 जनवरी 2026 से लागू होगा।
संबंधित योजनाएं और विभागीय प्रयास
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में लागू सात निश्चय-3 (2025-2030) के तहत स्तंभ-7 ‘सबका सम्मान-जीवन आसान (Ease of Living)’ के लक्ष्य को साकार करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। विभाग के प्रधान सचिव सी.के. अनिल के माध्यम से सभी जिलों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश भेजे गए हैं। साथ ही, ‘भूमि सुधार जन कल्याण संवाद’ जैसी पहल के माध्यम से जमीन से जुड़ी समस्याओं को समझने और समाधान करने का प्रयास किया गया है। इन संवाद कार्यक्रमों में नागरिकों ने अपनी समस्याएं सीधे विभाग के सामने रखीं, जिससे प्रशासन की संवेदनशीलता और जवाबदेही में सुधार हुआ है।
सभी राजस्व कार्यालयों में नागरिकों के साथ शालीन और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने के साथ ही, कार्यालय परिसरों में पेयजल, शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी अनिवार्य कर दी गई हैं। इसके अलावा, शिकायतों का डिजिटल रूप से संधारण और त्वरित निस्तारण भी अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि निगरानी और जवाबदेही मजबूत हो सके। प्रमंडलीय आयुक्त और जिलों के समाहर्ता अपने-अपने क्षेत्रों में नेतृत्वकारी भूमिका निभाएंगे, जिससे आम जनता को होने वाली परेशानियों को कम किया जा सके और जीवन स्तर में सुधार हो।









