नेपाल में भारी बारिश का प्रभाव बिहार के निचले इलाकों पर
पिछले कई दिनों से नेपाल (Nepal) में हो रही प्रचंड वर्षा ने बिहार के कई जिलों में विनाशकारी स्थिति पैदा कर दी है। नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे भारत-नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। रक्सौल नगर परिषद के कई वार्ड बाढ़ की चपेट में आ गए हैं, जिससे स्थानीय लोगों के घरों में पानी भर गया है और जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है।
सिरिसिया नदी का उफान और बाढ़ की भयावहता
नेपाल से जुड़ी सिरिसिया नदी इस समय अपने रौद्र रूप में है। नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण निचले इलाकों में दो से तीन फीट तक पानी भर चुका है। खासतौर पर सुंदरपुर क्षेत्र में स्थिति सबसे अधिक खराब है, जहां डंकन अस्पताल और चर्म रोग अस्पताल में मरीजों को पानी के बीच से गुजरना पड़ रहा है। इससे अस्पताल में इलाज करवा रहे मरीजों और उनके परिजनों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
बाढ़ का असर सरकारी और निजी संस्थानों पर
बाढ़ की चपेट में न केवल घर बल्कि सरकारी कार्यालय भी आ गए हैं। भारतीय महावाणिज्य दूतावास, रक्सौल अनुमंडल कार्यालय और कई अन्य सरकारी दफ्तरों में पानी भर गया है। इसके अलावा, कई स्थानों पर गैस सिलेंडर और घरेलू सामान पानी में डूबे हुए दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बारिश के मौसम में रक्सौल के निचले इलाकों की यही स्थिति बनती है, लेकिन इस बार हालात और भी भयावह हैं। प्रशासन की ओर से अभी तक राहत कार्यों में कोई विशेष पहल देखने को नहीं मिली है।
अस्पताल और गलियों में पानी भरने की स्थिति
एक महिला मरीज ने बताया कि अस्पताल पहुंचने के लिए उन्हें घुटने-भर पानी पार करना पड़ रहा है। वहीं, एक राहगीर ने कहा कि गलियों में नाव जैसी स्थिति बन गई है, और बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सभी परेशान हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल की नदियों में हो रही भारी बारिश का सीधा प्रभाव बिहार के निचले इलाकों पर पड़ता है। यही कारण है कि रक्सौल जैसे क्षेत्र बार-बार बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं।









