मोकामा में चुनावी माहौल में बदलाव और नई रणनीतियां
मोकामा जिले में दुलारचंद यादव की हत्या के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल गए हैं। जेडीयू के प्रत्याशी और बाहुबली नेता अनंत सिंह के जेल जाने के कारण चुनावी मैदान में नई ताकतें उभर रही हैं। इस स्थिति में केंद्रीय मंत्री और जेडीयू नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने अपने चुनावी अभियान की कमान संभाली है। उन्होंने मोकामा की चुनावी जंग को अपनी प्रतिष्ठा का विषय बना लिया है और अनंत सिंह की गिरफ्तारी को सहानुभूति का लाभ दिलाने का प्रयास कर रहे हैं।
ललन सिंह का चुनावी दांव और अनंत सिंह का समर्थन
मोकामा में वोट मांगने उतरे ललन सिंह ने स्पष्ट कहा कि अब हर वोटर को अनंत सिंह की तरह चुनाव लड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब अनंत सिंह जेल में थे, तब उनकी जिम्मेदारी कम थी, लेकिन अब जब वे जेल में हैं, तो उनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है। उन्होंने यह भी कहा कि आज से उन्होंने मोकामा की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली है। जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष और मोदी सरकार में मंत्री ललन सिंह ने अपने प्रचार के दौरान अनंत सिंह के समर्थन में जोरदार भाषण दिए हैं। वे मोकामा के विभिन्न इलाकों में जाकर वोटरों से समर्थन मांग रहे हैं और उनकी गिरफ्तारी को एक साजिश करार दे रहे हैं।
सियासी समीकरण और मुंगेर का संदर्भ
ललन सिंह और अनंत सिंह की राजनीतिक कहानी पुरानी है। मुंगेर (Munger) लोकसभा क्षेत्र से सांसद रहते हुए ललन सिंह का संबंध मोकामा विधानसभा क्षेत्र से है, जहां से अनंत सिंह का सियासी वर्चस्व रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में ललन सिंह ने अपने प्रतिद्वंद्वी के रूप में पूर्व विधायक और बाहुबली सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी को उतारा है। मोकामा में अनंत सिंह की पत्नी और आरजेडी की पूर्व विधायक नीलम देवी भी चुनाव लड़ रही हैं। इस मुकाबले में ललन सिंह का मुख्य उद्देश्य अपने सियासी वर्चस्व को बनाए रखना है, खासकर तब जब अनंत सिंह जेल में हैं।
भूमिहार समाज और सियासी जंग का केंद्र
मोकामा में दुलारचंद यादव हत्याकांड के बाद से ही अगड़ा और पिछड़ा वर्ग के बीच राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। यहां भूमिहार (Bhumihar) जाति का वर्चस्व माना जाता है, जिसमें अनंत सिंह, सूरजभान सिंह और ललन सिंह जैसे नेता शामिल हैं। मोकामा को भूमिहारों की राजधानी कहा जाता है, और इस क्षेत्र में जीतने वाला नेता अपने समाज में विशेष सम्मान प्राप्त करता है। अनंत सिंह के जेल जाने के बाद ललन सिंह ने सक्रिय रूप से मैदान में उतरकर सूरजभान सिंह की सियासी पकड़ को चुनौती दी है। इस लड़ाई को भूमिहार जाति की राजनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें जीत का मतलब न केवल चुनावी जीत बल्कि समाज में प्रतिष्ठा भी है।









