बिहार चुनाव में भोजपुरी गीतों का राजनीतिक प्रभाव
बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भोजपुरी संगीत का राजनीतिक परिदृश्य में गहरा प्रभाव देखने को मिल रहा है। इन गीतों का उपयोग राजनीतिक दल अपने समर्थकों को प्रेरित करने और विरोधी पक्ष को निशाना बनाने के लिए कर रहे हैं। खासतौर पर तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) के समर्थक इन गीतों के माध्यम से अपनी उम्मीदों को व्यक्त कर रहे हैं, जबकि विपक्षी दल इन गीतों को हिंसक और अस्थिरता फैलाने वाले मान रहे हैं।
भोजपुरी गीतों का सामाजिक और राजनीतिक संदर्भ
इन गीतों में अक्सर ‘कट्टा’, ‘दुनाली’, ‘छर्रा’ जैसे शब्दों का प्रयोग होता है, जो बिहार में जंगल राज की यादें ताजा कर देते हैं। ये गीत यादव समुदाय की ताकत और प्रभाव को दर्शाने के साथ ही, 1990 के दशक के ‘जंगल राज’ के दौर की यादें भी जगा रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इन गानों में युवाओं का उत्साह और यादव समुदाय का गर्व झलकता है, जो आगामी चुनाव में अपनी भूमिका को मजबूत करने का संकेत है।
राजनीतिक संदेश और विवादास्पद गीत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने इन भोजपुरी गीतों पर सीधा हमला बोलते हुए पूछा कि क्या बिहार को ऐसी हिंसक पहचान चाहिए, जो ‘जंगल राज’ की याद दिलाए। उन्होंने इन गीतों को ‘पांच K’ यानी ‘कंट्रा’, ‘क्रूरता’, ‘कड़वाहट’, ‘खराब शासन’ और ‘भ्रष्टाचार’ का प्रतीक बताया। इन गीतों में ‘कट्टा’ और ‘सटा’ जैसे शब्दों का प्रयोग इनकी हिंसक छवि को उजागर करता है, जो NDA (National Democratic Alliance) द्वारा ‘गुंडागर्दी’ का प्रतीक माना जा रहा है।











