बिहार चुनाव में महागठबंधन का तेजस्वी यादव को सीएम बनाने का निर्णय
बिहार विधानसभा चुनाव के लिए महागठबंधन ने गुरुवार को अपने प्रमुख नेता तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया, जबकि मुकेश सहनी को उपमुख्यमंत्री का चेहरा चुना गया। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य अति पिछड़े वर्ग के वोटरों को अपने पक्ष में करना था।
इसके जवाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को अपने चुनावी अभियान की शुरुआत ‘कर्पूरी ग्राम’ (Kamchatka) से की, जो स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर का गांव है। इस कदम के माध्यम से मोदी ने अपने भाषण का केंद्रबिंदु अति पिछड़े वर्ग को बनाया और कर्पूरी ठाकुर के योगदान को याद किया।
प्रधानमंत्री मोदी का कर्पूरी ठाकुर पर विशेष ध्यान
पीएम मोदी ने कहा कि वे स्वयं कर्पूरी ग्राम गए और वहां उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त की। उन्होंने बताया कि कर्पूरी ठाकुर की आशीर्वाद से ही आज मैं और नीतीश कुमार जैसे पिछड़े और गरीब परिवारों से आने वाले नेता इस मंच पर खड़े हैं। मोदी ने यह भी कहा कि स्वतंत्र भारत में सामाजिक न्याय स्थापित करने और वंचित वर्गों को नए अवसर देने में कर्पूरी ठाकुर का योगदान अतुलनीय रहा है।
प्रधानमंत्री ने बिहार चुनाव अभियान की शुरुआत कर्पूरी ठाकुर की धरती से कर अति पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने का प्रयास किया है। बिहार में इस वर्ग का वोटबैंक बहुत महत्वपूर्ण है, जो किसी भी राजनीतिक दल का खेल बिगाड़ या बना सकता है। इसलिए सभी दल इस वोट बैंक पर अपनी नजरें गड़ाए हुए हैं, जिसमें कर्पूरी ठाकुर का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।
बिहार में अति पिछड़ा वर्ग का राजनीतिक महत्व
बिहार में अति पिछड़ा वर्ग की आबादी लगभग 36 प्रतिशत है, जिसमें करीब 114 जातियां शामिल हैं। इस वर्ग की संख्या इतनी अधिक है कि सत्ता की चाबी अब इन्हीं के हाथ में मानी जा रही है। इनमें केवट, लुहार, कुम्हार, कानू, धीमर, रैकवार, तुरहा, बाथम, मांझी, प्रजापति, बढ़ई, सुनार, कहार, धानुक, नोनिया, राजभर, नाई, चंद्रवंशी, मल्लाह जैसी जातियां शामिल हैं।
हालांकि, इस वर्ग की सामाजिक और आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद, राजनीतिक प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कम है। छोटी-छोटी जातियों का चुनाव में प्रभाव बड़ा होता है, खासकर जब वे किसी दूसरे वोटबैंक के साथ मिल जाती हैं। इसी कारण सभी राजनीतिक दल अति पिछड़े वर्ग के वोट को हासिल करने के लिए प्रयासरत हैं।
राजनीतिक रणनीति और जातीय समीकरण
कर्पूरी ठाकुर ने सबसे पहले अति पिछड़े वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी पहल की थी। 1977 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने 26 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया, जिसमें अति पिछड़ा वर्ग को 12 प्रतिशत और पिछड़ा वर्ग को 8 प्रतिशत आरक्षण मिला।
बिहार की राजनीति में अति पिछड़ा वर्ग का महत्व बढ़ता जा रहा है। महागठबंधन ने तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया, लेकिन उपमुख्यमंत्री के रूप में मुकेश सहनी को चुना, जो अति पिछड़ी जाति से आते हैं। इस तरह महागठबंधन ने अति पिछड़ा वर्ग को अपने साथ जोड़ने का प्रयास किया है।
पीएम मोदी का जवाबी सियासी कदम
महागठबंधन की इस रणनीति का मुकाबला करने के लिए पीएम मोदी ने अपनी पहली रैली में मछली पालन और मल्लाह समुदाय को केंद्र में रखा। उन्होंने कहा कि बिहार में मछली उत्पादन में तेजी आई है और अब बिहार मछली का बड़ा निर्यातक बन चुका है। मोदी ने यह संदेश भी दिया कि एनडीए सरकार में ही मल्लाह समुदाय का विकास संभव है, जबकि महागठबंधन केवल वोट बैंक की राजनीति कर रहा है।









