पटना पुस्तक मेले में 15 करोड़ रुपये की अनोखी किताब का आकर्षण
पटना के पुस्तक मेले में इस बार एक ऐसी पुस्तक ने सभी का ध्यान आकर्षित किया है, जिसकी कीमत सुनकर हर कोई हैरान रह गया। यह पुस्तक, जिसका नाम ‘मैं’ है, उसकी कीमत 15 करोड़ रुपये बताई जा रही है और यह मेले का सबसे चर्चित और चर्चा में रहने वाला आकर्षण बन गई है। दावा किया जा रहा है कि यह विश्व की सबसे महंगी पुस्तक है, और इसकी लेखन प्रक्रिया ने भी लोगों की जिज्ञासा को बढ़ा दिया है।
लेखक का दावा और पुस्तक की विशेषताएं
लेखक रत्नेश्वर का कहना है कि इस 408 पन्नों की पुस्तक को उन्होंने ब्रह्ममुहूर्त में मात्र तीन घंटे चौबीस मिनट में लिखा। उनके अनुसार, 6 और 7 सितंबर 2006 की रात को लिखते समय उन्हें “ब्रह्मलोक यात्रा” और आध्यात्मिक जागरण का अनुभव हुआ, जिसे उन्होंने अपने शब्दों में पिरोया है। इस पुस्तक में कुल 43 अध्याय हैं और यह मानव की ‘मानने से जानने’ की यात्रा पर केंद्रित होने का दावा करती है।
पुस्तक का अनावरण और रहस्यपूर्णता
पुस्तक के अनावरण के दौरान लेखक ने इसे शोकेस में जरूर रखा, लेकिन किसी को भी इसके पन्ने पलटने की अनुमति नहीं दी। इस बात ने दर्शकों और साहित्यप्रेमियों के बीच कई तरह की चर्चाएं शुरू कर दी हैं। लोग जानना चाहते थे कि आखिर 15 करोड़ रुपये की इस किताब में ऐसा क्या लिखा है जो इसे इतना खास बनाता है, लेकिन लेखक ने इसे देखने की अनुमति नहीं दी।
लेखक का कहना है कि यह पुस्तक उनके आध्यात्मिक अनुभव, ध्यान की अवस्था और रासलीला के कथित साक्षात्कार पर आधारित है। उनका दावा है कि यह पुस्तक दुखों के अंत और ईश्वर-दर्शन के मार्ग को समझाती है। फिलहाल इस पुस्तक की केवल तीन प्रतियां ही बनाई गई हैं, जो विश्वभर में उपलब्ध बताई जा रही हैं। लेखक का इरादा इन्हें केवल 11 खास व्यक्तियों को ही सौंपने का है, जिनकी तलाश अभी जारी है।
पटना पुस्तक मेले में 15 करोड़ रुपये की इस अनोखी किताब ने जहां उत्सुकता पैदा की है, वहीं कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। क्या यह साहित्य का चमत्कार है या मार्केटिंग का कौशल? फिलहाल यह रहस्य बना हुआ है। यह ग्रंथ हिंदी भाषा में लिखा गया है, और इसका अंग्रेजी संस्करण भी इस आयोजन में लॉन्च किया गया है, जिसका अनुवाद कनिष्का तिवारी ने किया है। इसकी कीमत दोनों भाषाओं में 15 करोड़ रुपये है।










