बिहार विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे का नया समीकरण
बिहार विधानसभा चुनाव के लिए एनडीए (NDA) के उम्मीदवारों के नामों की घोषणा शुरू हो चुकी है, जिसके तहत जेडीयू (JDU) और बीजेपी (BJP) ने समान संख्या में 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। हालांकि, दोनों दल अपनी मजबूत सीटें किसी भी कीमत पर छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। नीतीश कुमार ने अपनी पहली उम्मीदवार सूची जारी कर एनडीए के सीट शेयरिंग समझौते को ही प्रभावित कर दिया है।
सीटों का बंटवारा और पार्टी के बीच मतभेद
एनडीए में तय हुआ था कि जेडीयू और बीजेपी समान रूप से 101-101 सीटें लड़ेंगे, जबकि शेष 41 सीटें सहयोगी दलों में बांटी जाएंगी। इनमें चिराग पासवान की एलजेपी (आर) को 29 सीटें, उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम और जीतनराम मांझी की हिंदुस्तान आवाम मोर्चा को छह-छह सीटें मिली थीं।
सीट बंटवारे के बाद से ही उपेंद्र कुशवाहा और जीतनराम मांझी नाराज हैं। वहीं, नीतीश कुमार ने चिराग पासवान को मिली पांच सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारकर स्थिति और जटिल बना दी है। इससे संकेत मिलता है कि एनडीए के भीतर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है।
जेडीयू की उम्मीदवारों की पहली सूची और सीटों का विवाद
बुधवार को जेडीयू ने अपनी पहली उम्मीदवार सूची जारी की, जिसमें कुल 57 सीटें शामिल हैं। इनमें से पांच सीटें चिराग पासवान की कोटे की हैं। एलजेपी को 29 सीटें मिली हैं, जिनमें मोरवा, गायघाट, राजगीर, सोनबरसा और एकमा जैसी सीटें शामिल हैं। जेडीयू ने इन सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं, जिससे स्पष्ट है कि पार्टी अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
राजगीर सीट पर मौजूदा विधायक कौशल किशोर और सोनबरसा के विधायक रत्नेश सदा को जेडीयू ने प्रत्याशी बनाया है। वहीं, एकमा सीट पर पूर्व विधायक धूमल सिंह, मोरवा पर विद्यासागर निषाद और गायघाट पर कोमल सिंह को टिकट दी गई है। इन सीटों का दावा चिराग पासवान की पार्टी का था, लेकिन नीतीश कुमार ने अपने प्रत्याशियों के साथ यह संदेश दे दिया है कि वे अपनी मजबूत सीटें नहीं छोड़ेंगे।
वहीं, जीतनराम मांझी ने भी चिराग पासवान को मिली मखदुमपुर सीट पर अपने प्रत्याशी उतारने का ऐलान किया है। इस तरह से एनडीए में खुलकर टकराव की स्थिति बन गई है। चिराग पासवान की योजना के तहत जिन 29 सीटों पर चुनाव लड़ने का विचार था, उनमें से कई सीटें जेडीयू और बीजेपी के कब्जे में हैं। जेडीयू अपनी जीत की सीटें छोड़ने को तैयार नहीं है, जबकि बीजेपी अपनी जीती हुई सीटें छोड़ने का मन नहीं बना रही है।










