बीजेपी ने बिहार और यूपी में नई नियुक्तियों के साथ जातीय राजनीति को मजबूत किया
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने हाल ही में बिहार और उत्तर प्रदेश (UP) में नई नेतृत्व नियुक्तियों की घोषणा की है, जिसमें दोनों राज्यों के नए प्रदेश अध्यक्ष शामिल हैं। इसके साथ ही, पार्टी ने नितिन नबीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया है। यह कदम उस समय उठाया गया है जब विपक्ष जाति आधारित राजनीति पर जोर दे रहा है।
पार्टी की रणनीति और जाति आधारित नियुक्तियों का संदर्भ
बीजेपी की इन नई नियुक्तियों में वही पुराना पैटर्न देखने को मिल रहा है, जो 2023 के अंत में तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों के बाद मुख्यमंत्रियों के चयन में देखा गया था। इस समय पार्टी उस माहौल में है जहां विपक्ष जातिवाद को लेकर मुखर है। बिहार चुनाव के दौरान भी जाति सर्वे और जाति जनगणना को लेकर जोरदार अभियान चलाए गए थे। केंद्र सरकार भी राष्ट्रीय जनगणना के साथ-साथ जाति जनगणना कराने का मन बना चुकी है।
बिहार और यूपी में जाति आधारित नेतृत्व का विश्लेषण
बिहार में बीजेपी ने न केवल प्रदेश अध्यक्ष बदले हैं, बल्कि राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष भी बिहार से ही नियुक्त किया है। यह नियुक्ति अस्थायी है, पूर्णकालिक अध्यक्ष का इंतजार है। बिहार के नए अध्यक्ष संजय सरावगी भी सवर्ण वर्ग से हैं, जो कायस्थ जाति से आते हैं। इसी तरह, यूपी में भी पार्टी ने कुर्मी जाति से पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है, जो ओबीसी वर्ग से हैं। इससे स्पष्ट है कि बीजेपी जाति आधारित राजनीति को जारी रखते हुए अपने नेतृत्व में सवर्ण और पिछड़ी जातियों का संतुलन बनाने का प्रयास कर रही है।










