बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों में तेजी
बिहार विधानसभा चुनाव का समय नजदीक आते ही राजनीतिक गतिविधियों में तेजी देखने को मिल रही है। अभी तक एनडीए (NDA) में सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय नहीं हो पाया है, जिसके कारण उच्चस्तरीय बैठकें लगातार चल रही हैं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य सीट शेयरिंग के मुद्दे पर सहमति बनाना है, ताकि चुनावी मैदान में मजबूती से उतर सकें।
एनडीए सहयोगियों के बीच मतभेद की आशंका
हालांकि, एनडीए के सहयोगी दलों के बीच अभी भी मतभेद की आशंका बनी हुई है। खासतौर पर जीतनराम मांझी (Jitan Ram Manjhi) की नाराजगी स्पष्ट रूप से देखी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, मांझी सीट बंटवारे के फार्मूले से असंतुष्ट हैं और संभव है कि वह अपने राजनीतिक कदम उठाने का मन बना रहे हैं।
मांझी का संभावित बड़ा राजनीतिक कदम
सूत्रों के मुताबिक, यदि एनडीए में सीटों के बंटवारे पर सहमति नहीं बन पाती है, तो मांझी अपने समर्थकों के साथ मिलकर 15 से 20 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकते हैं। इस बीच, HAM (हिंदुस्तान आवाम मोर्चा) ने अपने सभी नेताओं से बातचीत कर विधानसभा चुनाव में भाग लेने का अपना रुख स्पष्ट किया है।
बैठकें और राजनीतिक समीकरण
बिहार चुनाव से पहले शनिवार को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जिसमें केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah), भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा (JP Nadda), बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल और अन्य गठबंधन सहयोगी शामिल थे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सीट शेयरिंग पर अंतिम निर्णय लेना था।
सभी सहयोगियों के बीच सहमति की उम्मीद
भाजपा ने जानकारी दी है कि एनडीए के सभी सहयोगियों के साथ सीट शेयरिंग का फॉर्मूला रविवार तक तय हो सकता है। इस बैठक में बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सभी नेताओं ने अपनी राय रखी है और कोई नाराजगी नहीं है।
जेडीयू और एलजेपी के बीच सहमति लगभग तय
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, जेडीयू (JDU) और एलजेपी (LJP R) के बीच सीट शेयरिंग पर लगभग सहमति बन गई है। जेडीयू संभवतः 101-102 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि भाजपा जेडीयू से एक सीट कम पर चुनाव मैदान में उतरेगी।
मांझी की नाराजगी और राजनीतिक विकल्प
वहीं, HAM (हिंदुस्तान आवाम मोर्चा) के नेता जीतनराम मांझी नाराज बताए जा रहे हैं। एनडीए सूत्रों के अनुसार, मांझी अपनी नाराजगी दूर करने के लिए कोई बड़ा कदम उठा सकते हैं। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राजेश पांडेय ने कहा कि उनके पास सभी विकल्प खुले हैं और राजनीति में मित्र या शत्रु स्थायी नहीं होते।
भविष्य की रणनीति और संभावित चुनावी कदम
यदि सीट बंटवारे में सहमति नहीं बनती है, तो मांझी अपने समर्थकों के साथ मिलकर 15 से 20 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकते हैं। इस बीच, पार्टी प्रमुख चिराग पासवान (Chirag Paswan) को पार्टी के निर्णय लेने की पूरी स्वतंत्रता दी गई है।










