साइबर ठगी के बढ़ते मामलों ने आम जनता और माननीयों को चिंतित किया
साइबर धोखाधड़ी की घटनाएं अब सामान्य नागरिकों के साथ-साथ विधायकों को भी प्रभावित कर रही हैं। बिहार विधान परिषद में जब इस विषय पर चर्चा हुई, तो सदस्यों के चेहरे पर चिंता साफ झलकने लगी। इस चर्चा में पता चला कि साइबर अपराधी बड़े ही चालाकी से लोगों को फंसाने के नए-नए तरीके अपना रहे हैं।
सदस्यों ने बताया कि हजारों लोग इन जालसाजियों का शिकार हो चुके हैं। ये अपराधी फर्जी फीडबैक, मुफ्त टूर पैकेज, डिनर ऑफर या सीबीआई अधिकारी बनकर लोगों को ठग रहे हैं। कई बार इन ठगों ने फोन कर कहा कि उनके बच्चे का अपहरण हो गया है और तुरंत पैसे ट्रांसफर करने को कहा जाता है। इस तरह की धोखाधड़ी से जनता में भय और असमंजस का माहौल बन गया है।
साइबर अपराधों के खिलाफ सरकार की कार्रवाई और सुझाव
विधानसभा में एमएलसी संजय सिंह ने बताया कि उन्हें भी एक बार फोन आया था, जिसमें कहा गया कि उनके बेटे का अपहरण हो गया है। उन्होंने कहा कि भोले-भाले लोग इन साइबर ठगों के जाल में फंस रहे हैं। कई बार गुमनाम फोन उठाने पर धमकियां दी जाती हैं। तीन साल पहले उन्होंने खुद साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।
सदस्यों ने सुझाव दिया कि साइबर अपराध से निपटने के लिए स्कूलों में साइबर शिक्षा को शामिल किया जाए। एमएलसी संजीव सिंह ने कहा कि साइबर शिक्षा का पाठ्यक्रम माध्यमिक स्कूलों में शुरू किया जाना चाहिए। साथ ही, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि सरकार ने साइबर ठगी के खिलाफ 1,17,812 मामलों का सामना किया है। इनमें से 54,256 खातों को तुरंत ब्लॉक किया गया और लाखों रुपये वापस भी जनता को दिलाए गए हैं। सरकार ने इस दिशा में नई यूनिट भी स्थापित की है, जो साइबर अपराधों को रोकने के लिए काम कर रही है।
साइबर अपराधों से निपटने के लिए सरकार की नई पहल
सरकार की कोशिश है कि साइबर ठगी के मामलों को पूरी तरह से रोका जाए। इस दिशा में नई वैकेंसी भी निकाली जा रही हैं ताकि विशेषज्ञों की टीम मजबूत हो सके। साइबर अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और जागरूकता अभियान से ही इस समस्या का समाधान संभव है। जनता को भी चाहिए कि वे सतर्क रहें और संदिग्ध कॉल या संदेशों से दूरी बनाएं।









