राजनीतिक असमंजस के बीच लालू यादव का दही-चूड़ा भोज संशय में
विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के पारंपरिक दही-चूड़ा भोज को लेकर अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। यह आयोजन हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर पटना में लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के आवास पर आयोजित होता है। हालांकि, इस बार चुनाव परिणामों के बाद इस पर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
चुनावी हार के बाद पार्टी और परिवार की स्थिति में बदलाव
चुनाव में हार के बाद से ही पार्टी और परिवार दोनों के बीच स्थिति बदलती नजर आ रही है। मकर संक्रांति का त्योहार नजदीक है, लेकिन लालू यादव की स्वास्थ्य स्थिति और राजनीतिक गतिविधियों के कारण इस बार दही-चूड़ा भोज का आयोजन संदिग्ध बना हुआ है। लालू प्रसाद यादव दिल्ली में आंख की सर्जरी के बाद स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं, वहीं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी छुट्टियों पर हैं और अभी पटना नहीं लौटे हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार लालू-राबड़ी आवास पर यह पारंपरिक आयोजन होगा या नहीं।
तेज प्रताप यादव का सियासी कदम और भोज का आयोजन
इसी बीच, लालू यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल (JDU) के नेता तेज प्रताप यादव ने मकर संक्रांति के अवसर पर अपने आवास पर 14 जनवरी को दही-चूड़ा भोज का आयोजन करने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने इस आयोजन के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, राज्यपाल और दोनों उपमुख्यमंत्रियों को भी आमंत्रित करने की योजना बनाई है। तेज प्रताप का कहना है कि यह आयोजन सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा है, जिसमें सभी वर्ग के लोग भाग ले सकते हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी की ओर से उनके छोटे भाई और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को भी इस भोज के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया जाएगा। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या यह आयोजन तेज प्रताप यादव के परिवार से नजदीकियां फिर से बढ़ाने का प्रयास है या फिर यह आरजेडी के भीतर नई सियासी लकीरें खींचने का संकेत है।










