खेसारी लाल यादव का राजनीतिक सफर और बिहार चुनाव में उनकी भूमिका
बिहार चुनाव के दौरान खेसारी लाल यादव ने तेजस्वी यादव को समर्थन देने की मांग की है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उनका मकसद भी इसी दिशा में है। जैसे बीजेपी मैथिली ठाकुर को चुनाव मैदान में उतार रही है, वैसे ही सभी राजनीतिक दल प्रभावशाली कलाकारों का इस्तेमाल अपनी चुनावी रणनीति के तहत करते रहे हैं। खेसारी लाल यादव भी जनता से वोट मांगते समय कह रहे हैं कि उनकी जीत का रिकॉर्ड बनना चाहिए, जैसे कैसेट्स के रिकॉर्ड बनते हैं।
खेसारी लाल यादव खुद को राजनीतिक परंपरा से अलग बताते हैं और कहते हैं कि वे कोई पारंपरिक नेता नहीं हैं। उनका मानना है कि राजनीति उनके लिए एक जिम्मेदारी है, जिसे वह अपने गीतों के माध्यम से जनता की आवाज बनकर निभाना चाहते हैं। उनका उद्देश्य है कि बिहार में विकास और बदलाव लाना, और जनता के दिलों में अपनी जगह बनाना।
खेसारी लाल यादव का चुनाव लड़ने का कारण और उनकी रणनीति
खेसारी लाल यादव ने पहले चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं जताई थी, बल्कि उनकी इच्छा थी कि उनकी पत्नी चंदा देवी चुनाव लड़ें। हालांकि, वोटर लिस्ट में उनका नाम न होने के कारण उन्हें मैदान में उतरना पड़ा। वह छपरा विधानसभा क्षेत्र से आरजेडी (RJD) के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि पवन सिंह बीजेपी के समर्थन से प्रचार कर रहे हैं।
खेसारी लाल यादव ने सोशल मीडिया पर अपने चुनाव अभियान की शुरुआत करते हुए कहा कि वह जनता का बेटा और भाई हैं। उनका कहना है कि राजनीति उनके लिए कुर्सी की दौड़ नहीं, बल्कि छपरा के हर घर तक विकास पहुंचाने का एक माध्यम है। उन्होंने अपने गीतों की तरह ही इस बार भी वोटों का रिकॉर्ड बनाने का संकल्प व्यक्त किया है।
तेजस्वी यादव के लिए खेसारी लाल यादव का समर्थन और चुनावी समीकरण
छपरा सीट एनडीए (NDA) के हिस्से में आती है, और इस सीट पर पहले भी आरजेडी और बीजेपी के बीच मुकाबला होता रहा है। 2005 में जेडीयू ने यह सीट आरजेडी से छीनी थी, और 2010 में बीजेपी को दी गई। 2014 में आरजेडी ने फिर से यह सीट अपने नाम की, लेकिन 2020 में बीजेपी ने फिर से कब्जा कर लिया। इस बार बीजेपी ने मौजूदा विधायक सीएन गुप्ता का टिकट काटकर छोटी कुमारी को मैदान में उतारा है।
बिहार में तेजस्वी यादव ने खेसारी लाल यादव को टिकट देकर यह दिखाने की कोशिश की है कि वह अपने प्रभावशाली कलाकारों का इस्तेमाल कर चुनावी मैदान में मजबूती से उतर रहे हैं। खेसारी लाल यादव का समर्थन तेजस्वी यादव के लिए भी रणनीतिक है, ताकि वे अपने विरोधियों को काउंटर कर सकें। वह कहते हैं कि जंगलराज की बात सुनकर उन्हें बुरा लगता है, और उन्होंने कहा कि 15 साल का जंगलराज भी बिहार को स्वर्ग नहीं बना पाया।











