कन्हैया कुमार का वर्तमान राजनीतिक स्थिति और गतिविधियां
कन्हैया कुमार, जो कभी बिहार की राजनीति में चर्चा का केंद्र थे, आजकल अपने राजनीतिक कदमों और गतिविधियों को लेकर सुर्खियों में हैं। बिहार में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान उन्होंने अपनी सक्रियता दिखाई, लेकिन फिर भी वह मुख्यधारा की राजनीति से दूर ही नजर आए। मार्च महीने में उन्होंने ‘पलायन रोको नौकरी दो यात्रा’ निकाली थी, जिससे उनकी जनता के बीच पकड़ मजबूत हुई।
हालांकि, जब राहुल गांधी अपनी वोटर अधिकार यात्रा पर निकले, तो कन्हैया कुमार को पटना में राहुल-तेजस्वी यादव की गाड़ी पर चढ़ने से रोक दिया गया। इस पूरी यात्रा में वह पीछे ही रह गए। 2024 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी ने उन्हें बेगूसराय से उम्मीदवार बनाया, लेकिन यह भी लालू यादव की मंजूरी न मिल पाने के कारण ही संभव हो पाया।
कन्हैया कुमार की राजनीतिक गतिविधियों और विवाद
कन्हैया कुमार ने हाल ही में पटना के ‘बिहार में कांग्रेस कितनी प्रभावशाली’ सेशन में भाग लिया, जहां उन्होंने महागठबंधन में सीटों की खींचतान और तेजस्वी यादव के साथ उनकी नजदीकियों पर सवाल उठाए। इस दौरान उन्होंने कहा कि वह अब टिकट बांटने का काम कर रहे हैं और यदि वह मंच पर नहीं होते, तो शायद किसी नॉमिनेशन रैली में होते।
2016 में तिहाड़ जेल से छूटने के बाद जब वह बिहार पहुंचे, तो उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से हुई। लेकिन सबसे अधिक चर्चा लालू यादव से उनकी मुलाकात की रही, जब उन्होंने लालू यादव के पैर छुए थे। सोशल मीडिया पर यह तस्वीर वायरल होने के बाद तीखी प्रतिक्रियाएं भी आईं।
सितंबर 2021 में कन्हैया कुमार ने सीपीआई छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा। इसके बाद अक्टूबर में वह कांग्रेस के युवा नेताओं के साथ पटना पहुंचे, जहां तारापुर और कुशेश्वर स्थान के उपचुनाव हो रहे थे। इस दौरान गुजरात के दलित नेता जिग्नेश मेवाणी और हार्दिक पटेल भी उनके साथ थे।
लालू यादव और तेजस्वी यादव के साथ संबंध और राजनीतिक विरोध
कन्हैया कुमार ने लालू यादव के पैर छूने के बाद कांग्रेस में अपनी नई भूमिका निभाई, लेकिन उनके और लालू-तेजस्वी के बीच की नाराजगी साफ दिख रही है। 2019 के लोकसभा चुनाव में महागठबंधन में सीपीआई को कोई सीट नहीं मिली, तो पार्टी ने अकेले ही कन्हैया कुमार को चुनाव लड़ाया। इस विरोध के कारण तेजस्वी यादव ने उनके खिलाफ अपने उम्मीदवार खड़े कर दिए।
कांग्रेस में शामिल होने के बाद भी, कन्हैया कुमार लालू यादव और तेजस्वी यादव पर तीखे हमले कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 30 साल में इन नेताओं ने कांग्रेस वोटर के लिए क्या किया, इसका जवाब उन्हें देना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा के खिलाफ लड़ने वाले कांग्रेस के साथ होंगे, और जो नहीं हैं, वे केवल गणित में लगे रहेंगे।
कन्हैया कुमार ने लालू यादव की बात करते हुए कहा कि लालू और तेजस्वी जैसे नेता लठैत जैसी भाषा बोलते हैं, जो उनके लिए चिंता का विषय है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लालू यादव ने कांग्रेस के बिहार प्रभारी भक्तचरण दास को ‘भकचोन्हर’ कहकर संबोधित किया था, जिससे दोनों के बीच तनाव पैदा हो गया था।
हालांकि, अभी भी कांग्रेस और आरजेडी का गठबंधन कायम है, और दोनों मिलकर बिहार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। लेकिन, कन्हैया कुमार को हर कदम पर लालू और तेजस्वी यादव के कोपभाजन का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उन्हें राजनीतिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा है।
कांग्रेस में भूमिका और भविष्य की राह
कन्हैया कुमार का बोलने का अंदाज प्रभावशाली है, और जयराम रमेश का मानना है कि लोग उन्हें सुनना चाहते हैं। इसी वजह से कांग्रेस ने उन्हें नेता की बजाय ‘प्रवक्ता’ का पद दिया है, जो पार्टी का बचाव करते रहते हैं। उनके भाषण और गतिविधियों से यह स्पष्ट है कि वह कांग्रेस के मजबूत स्तंभ बनना चाहते हैं।
वर्तमान में, कन्हैया कुमार कांग्रेस के साथ अपनी नई भूमिका में सक्रिय हैं, और उनकी राजनीतिक रणनीतियों पर नजर रखने वाले मानते हैं कि वह बिहार की राजनीति में अपनी जगह बनाने के लिए प्रयासरत हैं। हालांकि, लालू-तेजस्वी जैसे नेताओं के साथ उनके संबंध अभी भी तनावपूर्ण हैं, जो उनके राजनीतिक भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं।
आगे की राह में, कन्हैया कुमार को अपने राजनीतिक कदमों को संतुलित करना होगा, ताकि वह जनता और पार्टी दोनों का भरोसा जीत सकें। बिहार की राजनीति में उनकी भूमिका और प्रभाव को देखते हुए, यह कहा जा सकता है कि उनका भविष्य अभी भी अनिश्चित है, लेकिन उनकी सक्रियता और भाषण शैली उन्हें एक मजबूत नेता बनाने की दिशा में ले जा सकती है।










