बिहार की राजनीति में जेडीयू के अंदर उथल-पुथल का संकेत
बिहार की सियासी दुनिया में जेडीयू (Janata Dal United) के भीतर अब असंतोष और विवाद की आग तेज हो रही है। पार्टी ने अपने ही सांसद की सदस्यता रद्द करने का निर्णय लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बांका से सांसद गिरधारी यादव की सदस्यता पर संकट मंडरा रहा है, और पार्टी ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई का संकेत दिया है।
जेडीयू ने सांसद गिरधारी यादव के खिलाफ कार्रवाई का कदम उठाया
जेडीयू के संसदीय दल के नेता और सुपौल से सांसद दिलेश्वर कामत ने मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष को एक औपचारिक नोटिस सौंपा है, जिसमें गिरधारी यादव की सदस्यता समाप्त करने की मांग की गई है। इस नोटिस में आरोप लगाया गया है कि सांसद पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहे हैं, जिनमें विशेष रूप से उनके द्वारा पार्टी की राय के खिलाफ SIR (Special Investigation Report) के मुद्दे पर की गई टिप्पणी शामिल है।
पार्टी विरोधी गतिविधियों और विवादित बयान का मामला
बिहार में जेडीयू के सूत्रों का कहना है कि सांसद गिरधारी यादव पार्टी के खिलाफ जाकर अपने बेटे के चुनाव प्रचार में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने 2025 के विधानसभा चुनाव में अपने बेटे चाणक्य प्रकाश रंजन के आरजेडी (RJD) का समर्थन किया था, जो पार्टी के लिए अनुशासनहीनता का संकेत माना जा रहा है। खास बात यह है कि गिरधारी यादव ने एसआईआर (SIR) से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले पर पार्टी लाइन से हटकर बयान दिया था, जिसे पार्टी ने तुगलकी फरमान करार दिया। इसी बयान को आधार बनाकर अब उनकी सदस्यता खत्म करने का कदम उठाया गया है।









