IRCTC घोटाले में आरोप तय करने की प्रक्रिया पर हाई कोर्ट का नोटिस
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के खिलाफ आरोप तय करने के खिलाफ दायर याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सीबीआई को नोटिस जारी किया है। इस मामले में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की एकल पीठ ने याचिका में उठाए गए मुद्दों पर सुनवाई करते हुए सीबीआई से जवाब मांगा है।
पिछले साल 13 अक्टूबर को राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू यादव, राबड़ी देवी और उनके बेटे तेजस्वी यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के आरोप तय किए थे। कोर्ट ने इस मामले में IPC की धाराओं 428, 120बी और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13(2) के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया था।
IRCTC घोटाले का मुख्य मामला और आरोपों की प्रक्रिया
IRCTC घोटाले में आरोप तय करने के आदेश को लालू यादव ने भी उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में लालू यादव, तेजस्वी यादव, राबड़ी देवी सहित अन्य आरोपियों को आरोपी बनाया है। यह मामला रांची और पुरी के दो होटलों BNR होटल के टेंडर में भ्रष्टाचार से जुड़ा है, जिसमें राउज एवेन्यू कोर्ट ने आरोप तय कर आरोपियों को अपना पक्ष रखने का समन भेजा था।
यह घोटाला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। आरोप है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में रेलवे के विभिन्न जोनों में ग्रुप D पद पर नियुक्तियों के बदले अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर जमीन-जायदाद का ट्रांसफर करवाया, जिससे उन्हें आर्थिक लाभ हुआ।
IRCTC घोटाले का संक्षिप्त परिचय और राजनीतिक संदर्भ
IRCTC घोटाला एक बड़ा भ्रष्टाचार का मामला है, जिसमें रेलवे टेंडर में अनियमितताएं और पदों पर नियुक्तियों में भ्रष्टाचार की बात सामने आई है। लालू यादव का यह कार्यकाल UPA-1 सरकार के दौरान था, और इस घोटाले ने राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा बटोरी है।
इस मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी और आरोप तय करने की प्रक्रिया अभी जारी है, और न्यायालय इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर रहा है। यह मामला न केवल भ्रष्टाचार का प्रतीक है, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए भी एक चुनौती बन चुका है।











