गया जिले के खंडेल गांव में निकाह की खुशी मातम में बदली
गया (Bihar) जिले के खंडेल गांव में इन दिनों उत्सव का माहौल होना चाहिए था, लेकिन वहां गहरी चिंता और निराशा का माहौल छाया हुआ है। गांव के जमील शाह के घर में आगामी 30 मार्च को तय निकाह की तैयारियां पूरी हो चुकी थीं। शादी के 500 कार्ड वितरित किए जा चुके हैं, होटल और ट्रैवल बुकिंग भी हो चुकी है, और लड़की वाले दिल्ली से गया पहुंच चुके हैं। लेकिन ईरान (Iran), इजरायल (Israel) और अमेरिका (US) के बीच चल रहे युद्ध के कारण, रिजवान नामक युवक कतर (Qatar) में फंसा हुआ है।
रिजवान की फ्लाइट रद्द होने से बढ़ी चिंता, परिवार ने की मदद की अपील
रिजवान ने अपने निकाह में शामिल होने के लिए 17 मार्च को टिकट बुक किया था, लेकिन उसकी फ्लाइट रद्द हो गई। इसके बाद वह अपने घर नहीं पहुंच सका। परिवार के सदस्यों की सलाह पर उसने 20 मार्च को फिर से कतर से नई टिकट बुक की, लेकिन दूसरी बार भी उसकी फ्लाइट रद्द हो गई। इससे पूरे गांव और परिवार में चिंता की लहर दौड़ गई है। गांव के लोग उसकी सलामती के लिए दुआ कर रहे हैं ताकि वह तय तारीख पर घर लौट सके और शादी का कार्यक्रम पूरा हो सके। ज्ञात हो कि शेरघाटी अनुमंडल के कई गांवों के 100 से अधिक युवक खाड़ी देशों में रोजी-रोटी के लिए गए हैं, जिनमें से कई अभी भी फंसे हुए हैं।
परिवार और गांववाले कर रहे दुआ, भारत सरकार से मदद की उम्मीद
रिजवान के भाई जहांगीर आलम ने बताया कि उनका छोटा भाई कतर में रहकर काम करता है और उसकी शादी 30 मार्च को तय है। पूरी तैयारी हो चुकी है, लेकिन रिजवान के आने का अभी कोई पता नहीं है क्योंकि युद्ध के कारण सभी फ्लाइट्स बंद हैं। परिवार के सदस्य और गांववाले उसकी सलामती के लिए मस्जिद में दुआ कर रहे हैं। यदि रिजवान बारात के दिन भी घर पहुंच जाता है, तो शादी कर दी जाएगी, और यदि नहीं तो तारीख आगे बढ़ा दी जाएगी।
रिजवान ने अपने निकाह के लिए तीन बार टिकट बुक किया था, लेकिन तीनों बार फ्लाइट रद्द हो गई। अभी भी उसके पास टिकट मौजूद है। पूरे गांव में, परिवार और जानने वालों में 500 कार्ड बांटे गए हैं, और सभी उम्मीद कर रहे हैं कि रिजवान घर लौट आएगा। रिजवान के चाचा कादिर शाह और तस्लीम आलम ने बताया कि गांव के लोग और परिवार की ओर से दुआ की गई है कि वह जल्द घर लौट आए। लड़की वाले भी दिल्ली से निकाह के लिए आ चुके हैं और तैयारी पूरी कर ली है।
रिजवान के पिता बहुत परेशान हैं और उन्होंने भारत सरकार से मदद की अपील की है। उनका कहना है कि वह अल्लाह पर भरोसा रखते हैं और उम्मीद है कि सब ठीक हो जाएगा। उन्हें चिंता है कि यह विदेश का मामला है और वहां का कानून क्या है, यह उन्हें नहीं पता। यदि भारत सरकार इसमें मदद करती है, तो परिवार को बहुत खुशी होगी।
हाल ही में दुबई (Dubai) से लौटे गांव के ही राजीव खान ने वहां के हालात का वर्णन करते हुए कहा कि शाम होते ही आसमान मिसाइलों और धमाकों की आवाज से गूंज उठता था। रातभर सोना मुश्किल हो जाता था। राजीव चौथी बार में टिकट मिलने पर बहुत मुश्किल से दिल्ली पहुंच पाए। उनके अनुसार, अभी भी खंडेल, बहेरा और सपा बिगहा जैसे गांवों के 100 से अधिक युवक वहां फंसे हुए हैं।











