चुनाव आयोग ने बिहार चुनाव में केंद्रीय फोर्स की तैनाती पर दी सफाई
बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर आरजेडी नेता तेजस्वी यादव द्वारा लगाए गए आरोपों पर चुनाव आयोग ने स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। आयोग ने कहा है कि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी तरह का पक्षपात नहीं होता है और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) पूरे देश के विभिन्न राज्यों से भेजे जाते हैं।
केंद्रीय फोर्स की तैनाती का स्रोत और नियंत्रण
आयोग के सूत्रों के अनुसार, इस बार बिहार में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश से भी फोर्सेज भेजी गई हैं। उन्होंने यह भी बताया कि चुनाव के दौरान तैनात की जाने वाली इन केंद्रीय बलों का नियंत्रण पूरी तरह से केंद्र सरकार के अधीन होता है और ये निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार कार्य करती हैं। इसलिए, यह जरूरी नहीं कि फोर्स किसी विशेष राजनीतिक दल या राज्य से हो। चुनाव आयोग ने तेजस्वी यादव के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सभी राज्यों से आने वाली फोर्सेज में कोई पक्षपात नहीं है।
मतदाता आंकड़ों और सुरक्षा व्यवस्था का विवरण
वोटर टर्नआउट के आंकड़ों के बारे में पूछे गए सवाल पर चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया कि पहले चरण के बाद महिला और पुरुष मतदाताओं के आंकड़े अलग-अलग जारी नहीं किए जाते हैं। यह डेटा आमतौर पर अंतिम चरण के बाद ही सार्वजनिक किया जाता है। दूसरे चरण के मतदान के बाद ही महिला, पुरुष और तीसरे लिंग के मतदाताओं का विस्तृत विवरण जारी किया जाएगा।
सुरक्षा बलों की तैनाती के संदर्भ में, आयोग ने बताया कि लगभग 80 प्रतिशत पुलिस बल केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) से तैनात किए गए हैं, जबकि केवल 20 प्रतिशत पुलिस बल राज्य सशस्त्र पुलिस (SAP) से हैं। इन SAP को झारखंड, तेलंगाना, केरल, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों से आनुपातिक रूप से लिया गया है, ताकि किसी भी राजनीतिक दल या राज्य का प्रभाव न हो।
इसके अलावा, चुनाव के दौरान पर्यवेक्षकों की निष्पक्ष तैनाती सुनिश्चित करने के लिए सभी राज्यों से उनके मूल राज्य की पार्टी को ध्यान में नहीं रखते हुए, उन्हें तैनात किया गया है। साथ ही, सभी स्ट्रॉन्ग रूम में CCTV कैमरे लगे हैं और यदि कहीं भी कोई खराबी पाई गई है, तो उसे तुरंत ठीक कर दिया गया है।











