मोकामा में राजनीतिक हिंसा का नया अध्याय
मोकामा विधानसभा क्षेत्र से करीब सौ किलोमीटर दूर पटना के पास एक जघन्य हत्या की खबर ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है। गुरुवार को यहां दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई, और इस घटना ने पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है। इस हत्या का आरोप जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के उम्मीदवार और बाहुबली नेता अनंत सिंह पर लगाया गया है।
हत्या का आरोप और राजनीतिक विवाद
अनंत सिंह ने इस हत्या के पीछे अपने विरोधी और बाहुबली सूरजभान सिंह का हाथ होने का दावा किया है। सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी मोकामा से राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। वहीं, दुलारचंद यादव की छवि एक दबंग नेता की थी, जो कभी लालू यादव के करीबी रहे, लेकिन बाद में अनंत सिंह के साथ आ गए थे। इस चुनाव में वह उनके विरोध में खड़े थे।
मोकामा की सियासी जंग और क्षेत्रीय प्रभाव
मोकामा के टाल इलाके में दुलारचंद यादव का सियासी वर्चस्व माना जाता है, और इसी क्षेत्र में उनकी हत्या हुई है। इस घटना ने बिहार के सियासी माहौल को गरम कर दिया है। मोकामा की राजनीति पिछले तीन दशकों से बाहुबलियों के इर्द-गिर्द घूमती रही है, जहां वर्चस्व की लड़ाई जातीय समीकरणों और बाहुबली नेताओं के बीच जारी है।
मोकामा की जातीय और सियासी ताकतें
मोकामा क्षेत्र में भूमिहार समुदाय का वर्चस्व है, जो यहां की राजनीति का मुख्य आधार है। इस इलाके में लगभग तीस प्रतिशत आबादी भूमिहारों की है, और सभी प्रमुख विधायक भी इसी जाति से आते रहे हैं। 1952 से अब तक जितने भी विधायक चुने गए हैं, वे सभी भूमिहार समुदाय से ही हैं।
जातीय समीकरण और चुनौती
यह क्षेत्र जातीय और सामाजिक समीकरणों का मिलाजुला परिणाम है, जहां यादव, राजपूत, कुर्मी, कोइरी, दलित और मुस्लिम समुदाय भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यादव समुदाय का वर्चस्व भी यहां मजबूत है, और 1990 के दशक में लालू यादव के उदय के साथ यादवों का राजनीतिक दबदबा बढ़ा।
यादव और भूमिहार के बीच संघर्ष
मोकामा में यादव और भूमिहार समुदाय के बीच सियासी संघर्ष सदियों से चलता आ रहा है। दुलारचंद यादव का उदय इसी संघर्ष का परिणाम था, जिन्होंने पहलवानी और दबंगई के बल पर क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत की। यादव समुदाय से ही उन्हें चुनौती मिलती रही है, और इस संघर्ष ने क्षेत्र की राजनीति को हमेशा गर्म रखा है।
बाहुबली नेताओं की वर्चस्व की लड़ाई
मोकामा की राजनीति बाहुबलियों के इर्द-गिर्द ही घूमती रही है। नब्बे के दशक में सूरजभान सिंह का नाम अंडरवर्ल्ड और बिहार की राजनीति दोनों में गूंजता था। वह मोकामा से विधायक भी रह चुके हैं और अपने दबदबे के लिए जाने जाते हैं। इस बार भी सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी आरजेडी के टिकट पर मैदान में हैं, जबकि अनंत सिंह जेडीयू के उम्मीदवार हैं।
बाहुबली बनाम बाहुबली की टक्कर
2020 में अनंत सिंह ने आरजेडी से चुनाव लड़ा था, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी जेडीयू के राजीव लोचन नारायण सिंह थे। इसके बाद 2022 के उपचुनाव में भी बाहुबली नेताओं के बीच मुकाबला हुआ। ललन सिंह, जो सूरजभान सिंह के करीबी माने जाते हैं, ने भी कई बार अनंत सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ा है। इस तरह, मोकामा की सीट पर बाहुबली नेताओं की वर्चस्व की लड़ाई सदियों से जारी है।










