बिहार विधानसभा चुनाव की पहली चरण की तैयारियां तेज
बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए मतदान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसमें कुल 121 सीटों पर वोटिंग होगी। इन सीटों के लिए नामांकन की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। राजधानी पटना से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक दलों के बीच बैठकें और मुलाकातों का दौर जारी है, लेकिन सीटों के बंटवारे का मसला अभी भी जटिल बना हुआ है। सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और विपक्षी महागठबंधन के बीच उम्मीदवारों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
एनडीए में सीटों का विवाद और नेताओं की सक्रियता
एनडीए के प्रमुख घटक दल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने सीटों के बंटवारे को लेकर चल रही खींचतान को सुलझाने के लिए अपने वरिष्ठ नेताओं को सक्रिय कर दिया है। खासतौर पर चिराग पासवान और जीतनराम मांझी की मांगें इस विवाद को और बढ़ा रही हैं। केंद्र सरकार में गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने शुक्रवार को लगातार चौथी बार दिल्ली में चिराग पासवान के आवास पर पहुंचकर बातचीत की। इससे पहले वे गुरुवार को तीन बार उनके घर गए थे। 9 अक्टूबर को भी नित्यानंद राय दोपहर में चिराग पासवान से मिलने पहुंचे थे, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। बाद में उन्होंने उनके आवास पर लंबी चर्चा की। रात को भी वे धर्मेंद्र प्रधान के साथ फिर से चिराग पासवान से मिलने पहुंचे। इस तरह, नित्यानंद राय ने 24 घंटे के भीतर चौथी बार चिराग पासवान से मुलाकात की है।
संबंधित राजनीतिक गतिविधियां और सीटों का फॉर्मूला
बीजेपी के नेताओं का मानना है कि अभी भी सीटों का विवाद पूरी तरह सुलझा नहीं है। पार्टी का दावा है कि उन्हें उतनी ही सीटें चाहिए जितनी चिराग पासवान ने मांगी हैं। वहीं, जीतनराम मांझी भी 15 सीटों से कम पर मानने को तैयार नहीं हैं। एनडीए के घटक दलों को सीटों के बंटवारे के फॉर्मूले पर राजी करने के लिए बीजेपी ने सक्रियता बढ़ा दी है। दूसरी ओर, महागठबंधन में भी सीटों को लेकर खींचतान जारी है।
महागठबंधन में सीटों का विवाद और बैठकें जारी
विपक्षी महागठबंधन में भी सीटों के बंटवारे को लेकर बैठकें चल रही हैं। तेजस्वी यादव के आवास पर कई दौर की बातचीत हो चुकी है, जिसमें मुकेश सहनी अपनी पार्टी के लिए 40 सीटें और डिप्टी सीएम पद की मांग कर रहे हैं। लेफ्ट पार्टियां भी कम से कम 30 सीटें चाह रही हैं, जबकि कांग्रेस 70 सीटों की डिमांड पर अड़ी है। इन बैठकों का सिलसिला अभी भी जारी है, और कोई ठोस समाधान निकलने में अभी वक्त लग सकता है।
सामंजस्य बनाने की कोशिशें और संभावित समझौते
दोनों गठबंधनों में ही सभी दल अपने-अपने तेवर पर कायम हैं। एनडीए में चिराग पासवान, जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा जैसे छोटे दलों को संतुष्ट करने के लिए बड़े दलों को अपनी तरफ से कुर्बानी देनी पड़ सकती है। बीजेपी और जनता दल (यूनाइटेड) अपने पास 205 सीटें रखने का लक्ष्य रखे हुए हैं, जबकि बाकी सीटों पर सहयोगियों को मनाना है। वहीं, महागठबंधन में भी आरजेडी और कांग्रेस को सीटों के बंटवारे में समझौता करना पड़ सकता है। इस राजनीतिक जटिलता के बीच, चुनावी मौसम में एकता बनाए रखने के लिए कौन-कौन कुर्बानी देगा, यह अभी भी एक बड़ा सवाल बना हुआ है।










